रांची 22 मई (आरएनएसस)। झारखंड में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित क्लस्टर कॉलेज कॉन्सेप्ट को लेकर एनएसयूआई झारखंड ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। एनएसयूआई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री बिनय उरांव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार स्वागतयोग्य है, लेकिन किसी भी नीति को लागू करने से पहले उसकी व्यावहारिकता और छात्रहित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (हृश्वक्क) के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को अपने रूड्डद्भशह्म् क्कड्डश्चद्गह्म् के साथ-साथ अनिवार्य रूप से ्रश्वष्ट, रूष्ठष्ट तथा रूद्बठ्ठशह्म् विषयों का अध्ययन करना होता है। ऐसे में कॉलेजों को अलग-अलग संकायों (स्ह्लह्म्द्गड्डद्वह्य) में विभाजित कर देने के बाद इन विषयों का प्रभावी संचालन व्यावहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। यदि क्लस्टर व्यवस्था लागू की जाती है तो इस मॉडल को हृश्वक्क के अनुरूप बनाने हेतु आवश्यक संशोधन और स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की जानी चाहिए।
इसके साथ ही वर्तमान समय में अधिकांश कॉलेजों का इन्फ्रास्ट्रक्चर क्लस्टर मॉडल के अनुरूप तैयार नहीं है। सीमित क्लासरूम, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्राओं के लिए आधारभूत सुविधाएं तथा बढ़ती छात्र संख्या के बीच बिना पर्याप्त तैयारी के इस व्यवस्था को लागू करना छात्रों पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न करेगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पीजी पाठ्यक्रमों को कॉलेज स्तर से हटाकर केवल विश्वविद्यालय स्तर पर केंद्रित करना भी चिंताजनक है। इससे विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवागमन, आर्थिक बोझ तथा पहुंच संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, जिससे उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट दर बढऩे की आशंका है।
एनएसयूआई झारखंड सरकार से मांग करती है कि क्लस्टर कॉलेज कॉन्सेप्ट लागू करने से पूर्व व्यापक समीक्षा, छात्र संगठनों एवं शिक्षकों से संवाद तथा आधारभूत संरचना की तैयारी सुनिश्चित की जाए।
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