अजय दीक्षित
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को गद्दार कह कर सारी मर्यादा तोड़ दी ये बीस मई की बात है।
राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपातकाल जैसा माहौल बनाना चाहते हैं जब सम्पूर्ण विपक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री मति इंदिरा गांधी के खिलाफ उठ खड़ा हुआ था। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकप्रियता में चरम पर है।अब तो विधानसभा चुनाव में मोदी को गारंटी चलने लगी है।
देश में गर्मी के साथ राजनीतिक माहौल भी गर्म है क्योंकि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रतिदिन अनाप शनाप बोल रहे हैं। हालत इतने खराब हैं कि इटली की प्रधानमंत्री श्रीमती मैलोडी को भारती ब्रांड चॉकलेट मेलोडी देने को राहुल गांधी ने कहा कि मोदी चॉकलेट खा रहे हैं और भारत में नीट परीक्षा का पेपर लीक हो ने पर 22 लाख परीक्षार्थियों अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। राहुल गांधी ने पिछले एक साल में मोदी को बेईमान, एपिसटिन फाइल तक के आरोप जड़ दिये जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब नहीं दे रहे हां भारतीय जनता पार्टी के नेता सुबेंदु अधिकारी, पियूष गोयल, जेपी नड्डा, निशिकांत दुबे आदि ने सदन में और बाहर भी मोदी के पक्ष में राहुल गांधी को लताड़ा है।राहुल गांधी की तर्ज पर मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी तक कहा है। लेकिन कहावत वही है कि हाथी चलता रहता है कुत्ते भोंकते रहते हैं। भारत में जैसे जैसे मोदी का कार्यकाल बढ़ता जा रहा है वैसे बैसे विपक्ष का धैर्य टूटता जा रहा है।
पश्चिम बंगाल,असम,में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने आग में घी का काम किया है। विपक्ष, इंडी एलायंस को लगता है कि 2029 में मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर पाए तो अस्तित्व समाप्त हो जाएगा ।इस लिए विपक्ष, इंडी एलायंस मोदी की राह में कांटे बिछा रहा है।कुछ ममता बनर्जी से उम्मीद थी मोदी का अश्मेघ को रोक ले गी लेकिन हुआ उल्टा ममता बनर्जी का बंगाल किला भी धय गया। असम से मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा राहुल गांधी को मुंह चिड़ा रहे हैं।
हरियाणा दिल्ली महाराष्ट्र पश्चिमी बंगाल, बिहार, दिल्ली,असम विधानसभा चुनाव की हार ने विपक्ष, इंडी एलायंस,की चूल्हें हिला दी है। पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव में सनातनी ध्रुवीकरण से विपक्ष अवाक रह गया है क्योंकि अगर यह ध्रुवीकरण आगे बढ़ा तो पूरे देश में विपक्ष निरुत्तर हो सकता है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, डीएमके के स्टालिन,सपा नेता अखिलेश यादव राजेडी तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी, प्रधानमंत्री के खिलाफ बहुत मुखर हैं। लेकिन इन लोगों को कोई जय प्रकाश नारायण नहीं मिल रहा है जो संपूर्ण हिंदी पट्टी में मोदी के खिलाफ 1975 जैसा आंदोलन पैदा कर दे । न ही बैसा समय रहा ।आज सोशल मीडिया का दौर है।देश की आवादी 1975 कि तुलना में 64 के विरूद्ध 145 करोड़ हो गई है।
हालांकि राहुल गांधी निर्वाचन आयोग,एस, आई आर,चुनाव में धांधली के नाम पर पूरे विपक्ष को लेकर आंदोलन वह भी देश व्यापी करना चाहते हैं। लेकिन कांग्रेस अभी उस स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल नहीं बना पायी है।
राहुल गांधी तो बढ़ते पेट्रोल, डीजल,गैस दामों के लिए मोदी को जिम्मेदार बनाते हैं। हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र में भारत के जहाज न निकलने को राहुल गांधी मुद्दा बनाकर चलना चाहते हैं। लेकिन वास्तविकता अलग है क्योंकि ईरान किसी देश टैंकर नहीं निकलने दे रहा है।राहुल गांधी गिरते रुपये के दामों के लिए भी मोदी की अर्थव्यवस्था को जिम्मेदार मानते हैं। राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपातकाल जैसा आंदोलन पैदा करना चाहते। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े मोदी को आतंकी कह कर संबोधित करना साजिश का परिणाम है। राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं तो पश्चिमी मीडिया को कहते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था चरमरा रही है क्योंकि वे ऐसा कर पूरे विश्व बिरादरी को संदेश देते हैं बल्कि यह भी किया जाता है कि जो नॉर्वे में घटा जब एक स्थानीय पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से यह पूछने की कोशिश की कि वे स्वतंत्र मीडिया से भारत में बात क्यों नहीं करते हैं। आनन फानन में नॉर्वे में विदेश मंत्रालय ने विशेष प्रेस ब्रीफिंग की । समझा जाता है कि इस प्रकरण में साजिश की बू आ रही है। राहुल गांधी ने
लन्दन में भारतीय संविधान को मोदी द्वारा चोट पहुंचाने की कोशिश की बात कही। वे चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते रहते हैं। टाईम्स, गार्जियन, न्यूयॉर्क टाइम्स,में इस प्रकार की खबरें प्रकाशित कराई गई है। राहुल गांधी ने विदेश यात्रा पर 60 करोड़ रुपए खर्च किया है।
इस खर्च का कोई ब्यौरा नहीं है क्योंकि कांग्रेस पार्टी के फंड से खर्च किया ।
नेता प्रतिपक्ष की बात करे तो अधिकांश समय ,1967 से यह पद अटल बिहारी वाजपेई के पास रहा 1977 से 1980 के बीच सी एम स्टीफऩ कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष रहे ।1998 से 2004 तक जब अटलजी प्रधानमंत्री बन गए थे तब यह पद सोनिया गांधी के पास रहा था 2014 से 2019 तक मल्लिकार्जुन खडग़े और 2019 से 2024 तक अधिरंजन चौधरी पास था अब राहुल गांधी है। अटल बिहारी वाजपेई जब नेता प्रतिपक्ष थे उस समय पर एक दो किताब भी लिखी गई है कि वह सरकार का पक्ष रखने विदेश भी गए थे। जवाहरलाल नेहरू, मति इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी वी नरसिंहराव से उनके कितने मधुर संबंध थे। लेकिन अब कटुता वातावरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में जैसे कोई रंजिश है।
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