मोदी सरकार की ऐतिहासिक पहल
- 01-Apr-25 12:00 AM
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केंद्र सरकार ने एक महत्त्वपूर्ण फैसला के तहत एल्युमीनियम फॉयल सहित पांच चीनी वस्तुओं पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय घरेलू उद्योगों को चीन से सस्ते आयात के निगेटिव असर से बचाने के लिए की गई है। वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डीजीटीआर (व्यापार उपचार महानिदेशालय) की सिफारिश के आधार पर व्यापार कार्रवाई की गई है। डीजीटीआर डंपिंग और सब्सिडी जैसे मामलों की जांच करती है।दरअसल, एंटी-डंपिंग ड्यूटी आयातित वस्तुओं पर लगाए जाने वाले टैक्स हैं, जो उनके निर्यात मूल्य और उनके सामान्य मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई के लिए लगाए जाते हैं, अगर डंपिंग के कारण आयात करने वाले देश में प्रतिस्पर्धी उत्पादों के उत्पादकों को नुकसान होता है। केंद्र सरकार के संज्ञान में यह बात लंबे अरसे से थी कि चीन भारत के घरेलू उद्योग को बर्बाद करने की साजिश में लगा हुआ है। आखिरकार सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। स्वाभाविक तौर पर सरकार के इस फैसले से भारतीय उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।सरकार को भी यह भरोसा है कि ऐसी सख्ती से भारतीय उद्योगों को मदद मिलेगी। इससे वे चीन से आने वाले सस्ते आयात से मुकाबला कर पाएंगे। भारत ने पहले ही चीन सहित विभिन्न देशों से सस्ते आयात से निपटने के लिए कई उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। इन सब तथ्यों से इतना तो साफ होता है कि चीन की नीयत में खोट है।वह भारत से मिलने वाली तमाम रियायतों और सुविधाओं को दरकिनार कर उसी का नुकसान पहुंचाने की जुगत में लगी रहती है। हो सकता है इस कदम के बाद चीन इस बात की संवेदनशीलता को समझेगा। ऐसे भी भारत के बाजार पर चीन के सामानों की बहुतायत है।कोई भी त्योहार मसलन दीपावली हो या होली; चीन किफायती कीमत के उत्पाद भारत में भेजता है। उसके इस कदम से भारत में काम कर रहीं कंपनियों की सेहत पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। निश्चित तौर पर केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के फैसले की सराहना की जानी चाहिए।घरेलू उद्योगों को जीवनदान देने के लिए यह एहतियाती कदम उठाना लाजिमी था। इस बात में कोई शक नहीं कि चीन सिर्फ अपना फायदा देखता है। उसके शब्दकोष में न तो संवेदना की जगह है और न नैतिकता की। इस नाते मोदी सरकार की यह पहल ऐतिहासिक मानी जाएगी।
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