दतिया 16 नवंबर (आरएनएस)। जिला चिकित्सालय, दतिया के एस.एन.सी.यू. यूनिट के कॉरिडोर में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग डिवाइस सफलतापूर्वक स्थापित कर एक अभिनव पहल की गई है। यह डिवाइस विशेष रूप से बिजली आपूर्ति एवं जनरेटर संचालन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा चिकित्सालय में डीज़ल की बचत हेतु विकसित किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह संपूर्ण डिवाइस किसी भी प्रकार का अतिरिक्त व्यय किए बिना, उपलब्ध कबाड़/अतिरिक्त सामग्री के जुगाड़ से तैयार किया गया है।
चिकित्सालय में भर्ती सभी नवजात शिशुओं, प्रसूता आपातकाल, ऑपरेशन थिएटर एवं विभिन्न वार्डों में जीवनरक्षक उपकरणों की निर्बाध और स्थिर विद्युत आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है, जिससे उपचार प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस डिवाइस का विकास एवं क्रियान्वयन किया गया है।
इस प्रणाली में 100 केव्हीए एवं 200 केव्हीए दोनों जनरेटरों की फीड लाइनें जोड़ी गई हैं। एमपीईबी से विद्युत आपूर्ति आने या बाधित होने पर यह डिवाइस तत्काल सिग्नल प्रदर्शित करता है। बिजली आने या जाने पर बजर के माध्यम से स्पष्ट अलर्ट प्राप्त होता है, जिससे वार्ड बॉय एवं तकनीकी स्टाफ समय पर जनरेटर संचालन सुनिश्चित कर पाते हैं। इसके अतिरिक्त, जिला चिकित्सालय परिसर में स्थापित दोनों ट्रांसफॉर्मरों तथा विद्युत नियंत्रण कक्ष के कंट्रोल पैनल में होने वाली लाइन ट्रिपिंग, फॉल्ट अथवा एमपीईबी द्वारा लाइन कट की सूचना भी यह डिवाइस तुरंत इंगित करता है। इससे संभावित विद्युत बाधाओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा।
डिवाइस के समक्ष एक हाई-रिज़ॉल्यूशन ऑनलाइन कैमरा भी स्थापित है, जो वाई-फाई से निरंतर जुड़ा रहता है। डिवाइस से प्राप्त सभी संकेत एवं अलर्ट मोबाइल फोन पर लाइव देखे जा सकते हैं, जिससे संपूर्ण विद्युत आपूर्ति प्रणाली की निगरानी और अधिक सरल, कुशल व विश्वसनीय हो गई है। इस अत्यंत उपयोगी एवं नवीन तकनीकी व्यवस्था की स्थापना में डॉ. के.सी. राठौर की संवेदनशीलता एवं सक्रिय नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा।
इस अभिनव तकनीकी व्यवस्था के निर्माण एवं स्थापना में इलेक्ट्रीशियन श्री अनिल सक्सेना की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। सीमित संसाधनों, उपलब्ध कबाड़ सामग्री और बिना किसी अतिरिक्त बजट के कार्य को संभव बनाना उनके तकनीकी कौशल, नवाचार-क्षमता और समर्पण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उनका यह योगदान न केवल प्रशंसनीय है बल्कि चिकित्सालय प्रशासन के लिए गौरव का विषय भी है।

