लखनऊ 17 नवंबर (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. नवीन कुमार अरोरा को देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों में से एक—एसोसिएशन ऑफ माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (्ररूढ्ढ)—द्वारा ‘फेलो ऑफ एकेडमी ऑफ माइक्रोबायोलॉजिकल साइंसेज़Ó की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित ्ररूढ्ढ के 66वें वार्षिक सम्मेलन एवं ‘नेक्स्ट-जन माइक्रोबायोलॉजी एजुकेशन, इनोवेशन एंड रिसर्च फॉर इकॉनमी, एनर्जी एंड एनवायरनमेंटÓ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदान किया गया।एसोसिएशन ऑफ माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (्ररूढ्ढ) वर्ष 1938 में स्थापित एक अत्यंत प्रतिष्ठित और पुराना वैज्ञानिक संगठन है, जिसने भारत में माइक्रोबायोलॉजी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में इसके 5526 आजीवन सदस्य हैं, जो इसे देश की अग्रणी वैज्ञानिक सोसायटियों में शामिल करते हैं।
प्रो. अरोरा को यह सम्मान पौधा–सूक्ष्मजीव अंत:क्रिया (श्चद्यड्डठ्ठह्ल-द्वद्बष्ह्म्शड्ढद्ग द्बठ्ठह्लद्गह्म्ड्डष्ह्लद्बशठ्ठह्य) के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय शोध कार्यों के लिए दिया गया है। उन्होंने पादप-विकास प्रवर्धक (श्चद्यड्डठ्ठह्ल द्दह्म्श2ह्लद्ध श्चह्म्शद्वशह्लद्बठ्ठद्द) बैक्टीरिया की नई प्रजातियों की खोज कर वैज्ञानिक जगत को नई दिशा प्रदान की है। उनके अध्ययन से यह समझने में महत्वपूर्ण मदद मिली है कि राइजोस्पेयर बैक्टीरिया किस प्रकार जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी पौधों की वृद्धि को प्रोत्साहित करते हैं।उनकी टीम द्वारा विकसित नए बायोफर्टिलाइजऱ ने उत्तर प्रदेश की लवणता प्रभावित भूमि को पुनस्र्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। इससे मध्य यूपी के ‘उसरÓ क्षेत्रों की कृषि भूमि फिर से उत्पादक बनी है और किसानों की आजीविका में सकारात्मक सुधार हुआ है। यह उपलब्धि कृषि आधारित क्षेत्रों में पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।इसके अलावा प्रो. अरोरा ने मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया एवं फफूंद को प्रयोगशाला में उगाने के लिए एक अभिनव ‘वीगन मीडियाÓ विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें पेटेंट भी प्राप्त हुआ है। यह मीडिया सूक्ष्मजीव विज्ञान में नई प्रजातियों की पहचान और आगे के अनुसंधान को गति प्रदान करेगा।प्रो. अरोरा अब तक 22 डॉक्टोरल शोधार्थियों का निर्देशन कर चुके हैं। वे अंतरराष्ट्रीय जर्नल श्वठ्ठ1द्बह्म्शठ्ठद्वद्गठ्ठह्लड्डद्य स्ह्वह्यह्लड्डद्बठ्ठड्डड्ढद्बद्यद्बह्ल4 के श्वस्रद्बह्लशह्म्-द्बठ्ठ-ष्टद्धद्बद्गद्घ भी हैं, जो उनकी वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और विशेषज्ञता को रेखांकित करता है।सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रो. अरोरा ने कहा कि यह उपाधि माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय से किए जा रहे सतत और समर्पित शोध कार्य की पहचान है। उन्होंने कहा कि ऐसे पुरस्कार शोधकर्ताओं को समाज के उत्थान तथा वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए और अधिक उत्साह से काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने इसे अपने साथ-साथ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का क्षण बताया।
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