प्रयागराज 17 नवंबर (आरएनएस)। आज साहित्यिक संस्था ‘उर्दू हिन्दी संगमÓ के तत्त्वावधान में बेंगलुरु के वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञानचन्द ‘मर्मज्ञÓ के दोहा संग्रह ‘आरोहीÓ की समीक्षात्मक चर्चा तथा कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता मारूफ़ उस्ताद शाइर अनवार अब्बास ‘अनवारÓने किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विजय लक्ष्मी ‘ ‘विभाÓतथा विशिष्ट अतिथि, दोहाकार डॉ0 प्रदीप चित्रांशी रहे। संचालन शाइरा संगीता श्रीवास्तव सुमन ने किया।
कार्यक्रम के संयोजक नवाब जाफर अस्करी ने स्वागत एवं आभार प्रकट किया। पुस्तक परिचर्चा में डॉ0 प्रदीप चित्रांशी ने पुस्तक के नाम ‘आरोहीÓ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पुस्तक का नाम आरोही रखकर कवि ने पुस्तक की सार्थकता का बयान किया है क्योंकि कृति में वर्णिक उपशीर्षक क्रमश: वन्दना से शुरू होकर धर्म-अध्यात्म पर ठहरता है। इसके बीच में परिवार, समाज एवं राजनीति आदिक विषयों को गम्भीरता से अपने अंतस में समाए हुए दिखाई देते है। विजयलक्ष्मी विभा ने कहा कि आरोही में कवि के द्वारा पिरोये गये दोहो के माला की मोती विविध भावों और विषयो को आत्मसात करके पाठक या श्रोता के मष्तिक को प्रभावित करके उन्हें चिन्तन के लिए विवश करते हुए दिखाई देते हैं।
अनवार अब्बास अनवार ने अध्यक्षीय उद्बोधन में दोहे की अर्थ सहित व्याख्या करते हुए कहा कि प्रत्येक दोहे भाव और विचार को पूर्णता के साथ अभिव्यक्त करने में सक्षम हैं। दोहो में प्रवाह है, गहराई है और पर्वत जैसी विचारों की ऊँचाई विद्यमान है। सुनील दानिश, अशोक कुमार श्रीवास्तव कुमुद, सुलेमान, शाहिद अस्करी आदिक ने भी अपने-अपने विचार रखे।
विचार गोष्ठी के बाद कवि-गोष्ठी शुरू हुई जिसमें मिर्जा राहिब, जाफर अस्करी, संगीता सुमन, सुनील दानिश, अशोक श्रीवास्तव कुमुद, डॉ प्रदीप चित्रांशी, विजय लक्ष्मी विभा, अनवार अब्बास आदिक कवियों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं का दिल गुदगुदाया।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

