दतिया 18 नवंबर (आरएनएस)। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दतिया डॉ. बी.के. वर्मा ने विगत दिवस सांस (सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रलाइज निमोनिया सक्सेसफुली) अभियान का शुभारंभ ग्वालियर रोड़ स्थित जीएनएमटीसी सेंटर के सभाकक्ष में किया। जिले भर में यह अभियान 12 नवम्बर, 2025 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा। अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों को रोकना है। मौके पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. डी.के. सोनी, जिला लेखा प्रबंधक अजय गुप्ता, आईआरडीएम आशीष खरे, जीएनएमटीसी की प्रिंसीपल, ट्यूटर समेत स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य फोकस समुदाय स्तर पर निमोनिया की रोकथाम, शीघ्र पहचान और उपचार को सुदृढ़ करना है।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरी और ग्रामीण इलाकों में जाकर अभिभावकों को निमोनिया के लक्षण जैसे तेज सांस लेना, लगातार खांसी और बुखार आदि की जानकारी देंगी। साथ ही पीसीवी, पेंटावेलेंट और एमआर जैसे टीकों के महत्व के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।
डीआईयू डॉ. सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के दौरान मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा 5 साल तक की उम्र के बच्चों का घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। निमोनिया के आकलन, निमोनिया का वर्गीकरण, खतरनाक लक्षणों के चिन्हों की पहचान, समुदाय आधारित निमोनिया का प्रबंधन, उपचार एवं रेफरल के संबंध में स्वास्थ्य कर्मियों का उन्मुखीकरण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निमोनिया फेफड़े का संक्रमण है। जिससे फेफड़ों में सूजन हो जाती है। निमोनिया होने पर बुखार खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। तेज सांस चलना या छाती का धंसना निमोनिया के मुख्य चिन्ह है। 5 वर्ष तक के बच्चों में सर्वाधिक मृत्यु का कारण निमोनिया है। देश में 16.3 प्रतिशत बाल्यकालीन मृत्यु निमोनिया के कारण होती है। आने वाले वर्ष में निमोनिया से होने वाली मृत्यु को 3 हजार प्रति जीवित जन्म से कम किया जाना है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में निवासरत अभिभावकों से बच्चों में सांस से जुड़ी परेशानी या बुखार दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाने की अपील की, ताकि समय पर इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी.के. वर्मा जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह का आयोजन शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में 15 से 21 नवम्बर, 2025 तक चलेगा। इस सप्ताह का उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल के महत्व को बढ़ावा देना और जनसामान्य में जागरूकता फैलाना है, ताकि प्रत्येक शिशु का जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रहे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की थीम नवजात सुरक्षा: हर स्पर्श, हर बार, हर शिशु के लिए नवजात देखभाल के प्रत्येक चरण में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल देती है। इस वर्ष की थीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्यकर्मी, माता-पिता और स्वास्थ्य संस्थाऐं सभी स्तरों पर हर प्रक्रिया और हर स्पर्श में सुरक्षा बनाए रखें। इसी उद्देश्य से नवजात सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु गतिविधियों की श्रृंखला निर्धारित की गई है, जिनमें संक्रमण नियंत्रण, दवाओं के सुरक्षित उपयोग, निदान की गुणवत्ता सुधार, तथा परिवार की सहभागिता को बढ़ावा देना शामिल है। यह प्रयास संस्था एवं समुदाय दोनों स्तरों पर नवजात देखभाल को अधिक सुरक्षित बनाने हेतु किए जाएंगे। राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह 2025 के सफल आयोजन हेतु जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय, संस्था आधारित एवं समुदाय आधारित गतिविधियां की जाएगी।

