नईदिल्ली,30 नवंबर (आरएनएस)। भारत ने इस साल जनवरी से सितंबर के बीच रूस से 54 लाख टन कच्चा तेल आयात किया है, जिसकी कीमत करीब 21 हजार करोड़ रुपये है। यूरोपियन थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने ये जानकारी दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये आयात ऐसे जहाजों के जरिए किया गया, जिनके मालिकाना हक और पंजीयन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं थी। इन्हें शैडो फ्लीट कहा जाता है।
रिपोर्ट में रूस पर आरोप लगाए गए हैं कि उसने प्रतिबंधों से बचने और कच्चा तेल पहुंचाने के लिए पुराने टैंकरों का इस्तेमाल किया। इनका मालिकाना हक स्पष्ट नहीं था, पंजीयन के दस्तावेज नकली थे और ट्रैकिंग सिस्टम खराब था। सीआरईए ने कहा कि सितंबर, 2025 तक 113 रूसी जहाज नकली झंडों के तले चल रहे थे, जिनमें कुल रूसी तेल निर्यात का 13 प्रतिशत हिस्सा था। इसकी कीमत करीब 48 हजार करोड़ रुपये थी।
रिपोर्ट में कहा गया है, सितंबर, 2025 तक 90 रूसी शैडो जहाज नकली झंडों के तले काम कर रहे थे। ये दिसंबर 2024 के मुकाबले 6 गुना ज्यादा है। 2025 की पहली 3 तिमाहियों में नकली झंडे वाले टैंकरों पर ट्रांसपोर्ट किए गए 48,000 करोड़ रुपये के रूसी तेल में से 21 हजार करोड़ रुपये (54 लाख टन) भारत आया था। सीआरईए ने बताया कि इस दौरान 30 जहाजों ने कच्चा तेल निर्यात किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। इस दौरान कुल भारतीय तेल आयात का एक-तिहाई से ज्यादा रूस से आया। रिपोर्ट में नकली झंडे वाले जहाजों के इस्तेमाल पर चिंता जताई गई है। ऊर्जा विशेषज्ञ ल्यूक विकेंडेन ने कहा, गलत झंडों के नीचे चलने वाले रूसी टैंकरों की संख्या खतरनाक दर से बढ़ी है। केवल सितंबर में नकली झंडे वाले जहाजों ने 14,000 करोड़ रुपये के रूसी तेल उत्पाद ढोए।
विकेंडेन ने कहा, गलत झंडे वाले जहाज का बीमा रद्द हो जाता है। इनमें से बहुत सारे टैंकर पुराने हैं और लगभग कबाड़ से दोबारा चालू किए गए हैं। इससे दुर्घटना या तेल रिसाव की स्थिति में उनके रास्ते में पडऩे वाले देशों के लिए खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर रूस ऐसे जहाजों का इस्तेमाल रोकता है, तो उसकी लागत बढ़ेगी और युद्ध प्रयासों को बनाए रखने वाले धन में कमी आएगी।
अमेरिका ने रूस की 2 सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगाया है, जिसमें रोसनेफ्ट ऑयल कंपनी (रोसनेफ्ट) और लुकोइल शामिल है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि दोनों कंपनियां क्रेमलिन की युद्ध मशीन को वित्त पोषित करती है। इससे भारतीय रिफाइनरियां भी प्रभावित हुई हैं। वहीं, रूस से तेल खरीद के चलते अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्ट टैरिफ भी लगाया है। फिलहाल भारत पर कुल 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू है।
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