बंगाल की सीएम ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से किया आग्रह
जगदीश यादव
जलपाईगुड़ी ,17 जनवरी (आरएनएस)। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुस्सा अक्सर कथित मीडिया ट्रायल पर उतरता रहता है। आज सीएम ने जलपाईगुड़ी में सर्किट बेंच के उद्घाटन के मौके पर सीजेआई सूर्यकांत के सामने ही उनसे संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका को बचाने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल पर भी रोक लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘कृपया देश के संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास और भूगोल को विनाश से बचाएं। बनर्जी ने कहा, “आप (प्रधान न्यायाधीश) हमारे संविधान के संरक्षक है, हम आपके कानूनी संरक्षण में है। कृपया जनता की रक्षा करें।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी कार्यक्रम में मौजूद थे। इस दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘आजकल मामलों के निपटारे से पहले ही ‘मीडिया ट्रायल’ का चलन है, इसे भी रोकना होगा।’ एक जनसभा के बाद अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में, ममता बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर को एक ऐसी भूमि के रूप में चित्रित किया जिसने औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष से लेकर 2011 के राजनीतिक उथल-पुथल तक बार-बार दमन के खिलाफ आवाज उठायी है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया था। उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के लंबे राजनीतिक प्रतिरोध के इतिहास का भी इस मौके पर जिक्र किया। बनर्जी ने लिखा, “अविभाजित मेदिनीपुर की धरती ने ब्रिटिश साम्राज्य की कठोर पकड़ को चुनौती देते हुए अत्याचार, शोषण और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की गर्जना की थी। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम मेदिनीपुर के लोग 2011 में लोकतंत्र की बहाली के लिए अग्रणी भूमिका में खड़े हुए। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच का उद्घाटन करते हुए इसे उत्तर बंगाल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया। इस पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। वहीं सीएम ने न्याय व्यवस्था में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश का हवाला दिया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम ममता ने एकता पर बल दिया और कहा कि जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, और सभी से मिलकर आगे बढऩे का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित न्यायिक परिसर की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरा किया गया कार्य सदा याद रखा जाएगा और इस सुविधा को मूल कलकत्ता उच्च न्यायालय भवन से भी बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि 40.08 एकड़ में फैले इस परिसर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं, जिसमें छह पूरी तरह से कार्यरत न्यायालय कक्ष और न्यायाधीशों के लिए 80 आवासीय क्वार्टर शामिल हैं, जिनमें मुख्य न्यायाधीश के लिए एक विशेष बंगला भी है। न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में राज्य सरकार के निवेश पर प्रकाश डालते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि रोके जाने के बावजूद, राज्य सरकार ने सर्किट बेंच पर किए गए खर्च के अलावा अब तक 1,200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में 88 त्वरित अदालतें स्थापित की गई हैं, जिनमें महिला न्यायालय, पीओसीएसओ न्यायालय, श्रम न्यायालय और मानवाधिकार न्यायालय शामिल हैं। अपने संबोधन में सीएम ने न्यायाधीशों से संघर्षरत और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता वाले युवा और कनिष्ठ वकीलों का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने मीडिया ट्रायल की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि फैसले सुनाए जाने से पहले ही व्यक्तियों को बदनाम करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने न्यायपालिका से कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की अपील की।
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