हेदायतुल्लाह पुरकैत
आमतला/कोलकाता,21 फरवरी (आरएनएस)। जैसा कि एकदम साफ था कि माकपा के कभी लाल सिपाही रहें प्रतीक उर रहमान का मोह उनकी पार्टी से भंग हो गया है। ठीक वैसा ही हुआ। आज तृणमूल के सर्व भारतीय महा सचिव अभिषेक बनर्जी के बगल में खड़े होकर प्रतीक उर रहमान ने साफ कहा, “मैं भाजपा को बंगाल में सत्ता में आने नहीं आने दूंगा”। प्रतीक क्या करेंगे यह तो समय बताएगा लेकिन पूर्व वामपंथी युवा नेता प्रतीक उर रहमान आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्य बन गए। दक्षिण 24 परगना के आमतला स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव व लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने प्रतीक को पार्टी का झंडा थमाकर उनका स्वागत किया। इस दलबदल को राज्य में वामपंथी खेमे के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। प्रतीक उर रहमान के इस्तीफे और पाला बदलने की पटकथा पिछले रविवार को ही लिख दी गई थी, जब उन्होंने माकपा की राज्य समिति, जिला समिति और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। उनका इस्तीफा पत्र सार्वजनिक होने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। हालांकि, शुरुआत में इसे केवल एक आंतरिक असंतोष माना जा रहा था, लेकिन पिछले चार दिनों से उनके तृणमूल में जाने की अटकलें लगातार बढ़ रही थीं। इस बीच, माकपा की हालिया राज्य समिति की बैठक में प्रतीक की अनुपस्थिति ने इन चर्चाओं पर मुहर लगाने का काम किया। शुक्रवार को माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने स्पष्ट कर दिया था कि प्रतीक उर रहमान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, आज सुबह प्रतीक ने भी मीडिया के सामने संकेत दिए थे कि वे जनसेवा के लिए एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतीक उर रहमान जैसे प्रखर युवा वक्ता का साथ छोडऩा माकपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के लिए यह संगठन को और मजबूती देने वाला कदम है। अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में प्रतीक के शामिल होने से यह स्पष्ट है कि तृणमूल अपनी युवा ब्रिगेड को विस्तार देने की रणनीति पर मजबूती से काम कर रही है। हालांकि, यह साफ है कि प्रतीक उर के पार्टी बदलने के बाद अलीमुद्दीन की चिंता बढ़ गई है। पार्टी के वरीय नेताओं के माथे पर धीरे-धीरे शिकन बढ़ती जा रही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर फोकस है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस पार्टी बदलाव का राज्य की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा।
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