भोपाल 16 मार्च (आरएनएस)।भोपाल जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं जिले के नागरिकों को रसायन मुक्त फल, फूल, सब्जियां एवं अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और महिलाओं को इस अभियान जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त और विशेष पहचान दिलाने के लिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी एवं उप संचालक कृषि सुमन कुमार ने जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को विशेष रूप से प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही है। भोपाल जिले के तीन गांव कोलूखेड़ी, सेमरीकलां एवं नलखेड़ा में लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही हैं जिसमें लगभग 30 दीदियां लखपति है।
इन्हीं दीदियों में से ग्राम पंचायत कोलूखेड़ी की प्रगतिशील सिंगल मदर किसान श्रीमती विनीता प्रजापति ने अपने गांव के घर में 5 वर्ष पहले किचिन गार्डन से प्राकृतिक सब्जियां उगाना प्रारंभ किया। इसके साथ एनआरएलएम के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका प्रारंभ की और वर्ष 2023 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तिरूपति में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेकर जिले की प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर बन गई है। प्रजापति बैरसिया ब्लॉक में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दे रही है और स्वयं भी अब 02 एकड़ में सब्जियों, गेहूं एवं चना की खेती कर भोपाल के प्राकृतिक खेती बाजार राग भोपाली में उत्पादों की विक्री कर जिले के नागरिकों को रसायन मुक्त सब्जियां, गेहूं एवं चना उपलब्ध करा रही है।
प्रजापति से प्रेरित होकर उनकी ग्राम पंचायत कोलूखेड़ी सहित आस-पास के 04-05 सेमरीकलां, नलखेड़ा, कोलूखेड़ी सड़क की लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही है और जिले एवं आस-पास हाट बाजारों के माध्यम से स्थानीय निवासियों को शुद्ध एवं रसायन मुक्त सब्लियां,गेहूं, चना एवं अन्य खाद उत्पाद उपलब्ध करा रही है। गृहणी से लखपति दीदी के सफर में विनीता प्रजापति सहित अन्य महिलाओं ने जिले में अपनी अलग पहचान बनाई है। शासन की कृषि, उद्यानिकी एवं पंचायत ग्रामीण विकास के साथ दीनदयाल अत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का मार्गदर्शन एवं योजनाएं महिलाओं को आत्म निर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वापूर्ण भूमिका अदा कर रहे है।
आज प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। पहले वे परंपरागत तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करती थीं। समय के साथ खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी और रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने लगी थी। समय-समय पर विनीता प्रजापति नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत राष्ट्रीय स्तर पर अलग – अलग संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त कर गांव महिलाओं को भी नेचुरल फार्मिंग की विशिष्ट तकनीकियों से अवगत करा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के विभिन्न अवयवों और तकनीकों को सीखा। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल बनाना सीखा और अपने खेत में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से इन्हें तैयार कर उपयोग करना शुरू किया। आज वे अपने 1 एकड़ क्षेत्र में सब्जियों की प्राकृतिक खेती कर रही हैं और पूरी तरह रसायन मुक्त सब्जियां उत्पादन कर रही हैं।
प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियों की मांग बाजार में अधिक होने लगी। विनीता प्रजापति अपनी सब्जियों को प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं। प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग 10 हजार रुपए प्रतिमाह शुद्ध लाभ अतिरिक्त प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। प्रदेश में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता है।
खेती की इस पद्धति को बढ़ावा देने के प्रयास चल रहे हैं। जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए क्लस्टर स्थापित करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश जैविक खेती में अग्रणी रहे। केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल को बढ़ावा देने के प्रयास किये जा रहे हैं।

