लंदन,03 अपै्रल। भारत समेत 60 से ज्यादा देशों ने बीते दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए आपातकालीन बैठक की। ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक में होर्मुज को लेकर राजनयिक और आर्थिक विकल्पों पर चर्चा की गई। युद्ध के चलते ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए अहम इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इससे भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट सामने आया है और महंगाई बढ़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में राजनयिक और आर्थिक विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे के माध्यम से जहाजों का आवागमन बहाल किया जा सके। आशंकाएं हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को खुलवाए बिना ही ईरान में अभियान खत्म कर सकते हैं। बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात समेत 60 से ज्यादा देश शामिल हुए। हालांकि, अमेरिका बैठक से दूर रहा।
बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने किया। इस दौरान भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन और नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के असर को रेखांकित किया। भारत ने यह भी बताया कि खाड़ी में चल रहे संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अपने नाविकों को खोने वाला वह इकलौता देश है। भारत ने कूटनीति और संवाद के महत्व पर जोर दिया।
ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सैन्य हस्तक्षेप के बजाय राजनीतिक और राजनयिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। देशों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी युद्धविराम समझौते में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बहाल करना शामिल होना चाहिए। हालांकि, इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो अगला कदम क्या होगा।
ट्रंप ने पहले कहा था, वे देश जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य की वजह से ईंधन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए मेरे पास सुझाव है। पहला- हमसे खरीदें, हमारे पास कोई कमी नहीं है। दूसरा- थोड़ी हिम्मत जुटाएं और होर्मुज तक जाकर छीन लें। अब आपको अपने लिए खुद लडऩा सीखना होगा। अमेरिका अब आपकी मदद के लिए वहां मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही, जैसे आप हमारे लिए मौजूद नहीं थे।
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