अजय दीक्षित
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक साधारण चुनाव नहीं है जिसमें सत्ता की लड़ाई हो। दो विचारों, अस्मिता, बर्चस्व, अस्तित्व की संघर्ष की लड़ाई यहां से बंगाल कहां जाएगा यह तय होगा। सही मायनों माइनोरिटी, मेजॉरिटी, मसल्स, मनी, मैनेजमेंट, ममता और मोदी की लड़ाई है।294 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से 142 पर 23 को अप्रैल वोट डाले जाएंगे। गार्जियन के चीफ एडिटर चित्रा घोष कहती है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी बहुत ही सादे भेष में चुनाव लड़ रही है। उसने 2021तरह इस बार ममता बनर्जी को बिना नाम लिए सरकार पर हमला किया है उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने बंगाल से सीपीएम जैसी कादर आधारित पार्टी 2011के विधानसभा चुनाव में उखाड़ दिया था लेकिन 2006 विधानसभा चुनाव में तुड़मूल कांग्रेस ने केवल 35 सीट प्राप्त की थी।तब बंगाल में सीपीएम सीपीई की सरकार बनी थी लेकिन 2010 में मुख्यमंत्री बासुदेव भट्टाचार्य ने टाटा को कार बनाने के लिए नंदीग्राम में जगह दी थी वही से ममता बनर्जी का राजनीतिक उदय हुआ।2011 में सीपीएम विधानसभा चुनाव हार गई । हिंदू के संपादक जयंत घोषाल कहते हैं कि 2026 का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी का चुनाव है।2021 में भारतीय जनता पार्टी ने 40 प्रतिशत वोट हासिल किए और 77 विधायक चुने गए। तुड़मूल कांग्रेस ने 200 से अधिक सीट प्राप्त किया।
कभी ब्रिटिश राज्य की राजधानी रही कोलकाता को महलों , इमारतों का शहर माना जाता है। ब्रिटिश राज्य सबसे पहले बंगाल में कायम हुआ । क्लाइव राइस ने 1757 में प्लासी की लड़ाई में बंगाल के नबाब सिराजुद्दौला को हरा कर ब्रिटिश राज्य की स्थापना की तत्कालीन समय में बंगाल में आज का बांग्लादेश,असम,उड़ीसा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों का का समूह था ।इसकी राजधानी मुर्शिदाबाद थी लेकिन ब्रिटिश ने कलकत्ता बनाई और एक किला भी बनाया जो शासन केंद्र था इसमें ब्रिटिश फौज रहती थी जिसका नाम था फोर्ट विलियम। मंगल पांडे ने इसी बंगाल की धरती से ब्रिटिश राज्य के खिलाफ बैरिक पुर से आजादी का बिगुल बजा दिया था 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ।आजादी के समय कांग्रेस ही मुख्य पार्टी थी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, खुदीराम बोस, रामकृष्ण परमहंस,शिशिर बसु, अरविंद घोष, विधानचंद्र राय, विपिन चंद्र पाल,जैसे नेता हुए । कोलकाता एक बहुआयामी नगर था जिससे ओद्योगिक इकाई थीं।मालदा, बहरामपुर,ढाका,में रेशम और पटसन का काम था। जुट उद्योग बहुत प्रसिद्ध था । लेफ्ट पार्टियों के शासन में 37 वर्षों में सब समाप्त हो गया रोज रोज के ट्रेड यूनियनों के धरनों से उद्योगों को बंद कर दिया। तुड़मूल ने कोई प्रयास नहीं किया। पश्चिमी बंगाल का विकास ,50 वर्षों से रुका हुआ है। बेरोजगारी, पलायन ही यहां की नियति है।युवा दिल्ली,मुंबई, रांची, गोहाटी जाने के लिए बाध्य है। बिहारी,बंगाली,भारत में मजदूर है। चिकित्सा, पढ़ाई के स्थापित कॉलेज भी राजनीत का शिकार हैं। लेफ्ट की रिजिम को हटाने के लिए राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते बहुत प्रयास किया था क्योंकि तत्कालीन समय में ममता बनर्जी कांग्रेस में ही थीं लेकिन असफल रहे । लेफ्ट पार्टियों ने गांव गांव नेक्सस था । शासकीय योजनाओं पर उनका कब्जा रहता था। लेफ्ट विधानसभा चुनाव में बूथ को जाम कर अपने वोट डाल देती थीं भारत में सबसे अधिक गैर कानूनी काम, घुसपेठ,बंगाल में ही होती है।यहां सर्वाधिक 35 फीसदी मतदाता मुस्लिम है।
इस बार की लड़ाई उसी माइनोरिटी से मेजॉरिटी करना चाहती है भारतीय जनता को। मसल्स, मनी, मैनेजमेंट तो भारतीय जनता पार्टी तुड़मूल कांग्रेस से अच्छा कर लेगी लेकिन लड़ाई ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच है बंगाल में ।
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