स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल, गली-गली झोलाछाप हॉस्पिटल
स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक
सुल्तानपुर 23 अप्रैल (आरएनएस)। जनपद में इन दिनों इलाज कम और खिलवाड़ ज़्यादा हो रहा है। शहर से लेकर कस्बों तक फर्जी हॉस्पिटल, क्लिनिक और पैथोलॉजी सेंटरों का ऐसा जाल फैल चुका है, मानो बिना डिग्री के डॉक्टर बनना अब सबसे आसान रोजगार हो गया हो। सवाल यह है कि क्या मरीजों की जान अब प्रयोगशाला बन चुकी है।
हकीकत यह है कि इन तथाकथित स्वास्थ्य केंद्रों में न तो योग्य डॉक्टर हैं, न ही जांच के मानक उपकरण, और न ही साफ-सफाई का कोई नामोनिशान। एक ही कमरे में क्लिनिक भी चल रहा है और पैथोलॉजी भी जैसे इलाज नहीं, कोई किराना दुकान हो। झोलाछाप विशेषज्ञ मरीजों की नब्ज़ से ज्यादा जेब टटोलने में माहिर नजर आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में फर्जी जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज किया जा रहा है, जिससे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं होता डर का कारोबार भी जोरों पर है। मरीजों को गंभीर बताकर लखनऊ रेफर करने का पैकेज सिस्टम चल रहा है, जहां एक मरीज पर हजारों रुपये का कमीशन सेट है। एंबुलेंस और दलालों की चांदी अलग सेकृ5 से 10 हजार रुपये तक की सेवा शुल्क के नाम पर खुली लूट। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या स्वास्थ्य विभाग सो रहा है या सब कुछ देखकर भी अनदेखा कर रहा है। जानकारों का कहना है कि अधिकारियों को हर गली-मोहल्ले की जानकारी है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें दौड़ती हैं धरातल पर कुछ नहीं। नियम साफ हैं बिना पंजीकरण और योग्य पैथोलॉजिस्ट के लैब चलाना गैरकानूनी है। फिर भी यह मौत का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। लगता है जैसे कानून सिर्फ कागजों में है और ज़मीनी हकीकत में सब सेट है। स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। मांग एक ही है इन फर्जी हॉस्पिटल और क्लिनिक पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो, वरना अगला शिकार कौन होगा, यह कोई नहीं जानता।
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