सरकारी भंडार खाली, महंगे बाजार से बीज खरीदने को मजबूर किसान लगातार
सुल्तानपुर। जिले में कृषि व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दोस्तपुर, मोतिगरपुर समेत विभिन्न विकास खण्डों में संचालित राजकीय कृषि बीज भंडारों पर ढैचा बीज की अनुपलब्धता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हरित खाद के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस फसल के बीज समय पर न मिलने से किसानों की खेती की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और उन्हें निजी बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है। जिले के कई बीज भंडारों पर पिछले कई वर्षों से ढैचा बीज की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस वर्ष भी हालात में कोई विशेष सुधार नहीं दिख रहा है। किसान जब बीज लेने के लिए भंडारों पर पहुंचते हैं, तो उन्हें बार-बार यही जवाब मिलता है कि बीज अभी उपलब्ध नहीं है या कुछ दिनों बाद आएं। इस तरह की अनिश्चितता से किसानों का समय और संसाधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ढैचा बीज की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थ्य दोनों पर पड़ेगा। इससे किसानों की आय प्रभावित होगी और कृषि लागत में भी अनावश्यक वृद्धि होगी। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। बीज भंडारों पर ढैचा बीज की तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और भविष्य में इस तरह की स्थिति न उत्पन्न हो, इसके लिए ठोस योजना बनाई जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या व्यापक कृषि संकट का रूप ले सकती है।
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