लखनऊ, 23 अप्रैल (आरएनएस )। उत्तर जोन खेती का प्राण है और कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं। प्रदेश के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में 24 अप्रैल को लखनऊ स्थित सेंट्रम होटल में उत्तर जोन क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में नौ राज्यों—उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब तथा दिल्ली—के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री, प्रमुख सचिव, निदेशक, किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक तथा भारत सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी तथा रामनाथ ठाकुर की उपस्थिति प्रस्तावित है।यह जानकारी प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कृषि ऋण, किसान ऋण पत्र, कृषि आधारभूत संरचना कोष की प्रगति, विभिन्न राज्यों के किसानों, नवाचार आधारित उद्यमों, किसान उत्पादक संगठनों, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, बैंकों, मिल संचालकों, प्रसंस्करण इकाइयों, बागवानी की संभावनाओं, दलहन आत्मनिर्भरता अभियान की प्रगति, बीज एजेंसियों, क्रय एजेंसियों, सिंचाई कंपनियों तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल अभियान सहित अनेक विषयों पर चर्चा और समीक्षा की जाएगी।कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के कल्याण और आय वृद्धि को लेकर विभिन्न राज्यों ने बेहतर कार्य किए हैं और वे अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण कर अन्य राज्यों को भी जानकारी देंगे। उत्तर प्रदेश में गन्ने के साथ सहफसली खेती को बढ़ावा दिया गया है। इसके साथ ही धान की सीधी बोआई विधि को लेकर भी प्रस्तुतिकरण किया जाएगा, जिसे भारत सरकार द्वारा किसानों के हित में उपयोगी पद्धति माना गया है। वहीं पंजाब सरकार द्वारा धान फसल विविधीकरण की पद्धति तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड द्वारा बागवानी क्षेत्र में अपनाई गई विशेष पद्धतियों की जानकारी भी साझा की जाएगी।सम्मेलन में नकली कीटनाशकों और उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण, प्रभावी वितरण व्यवस्था, वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने, संतुलित उपयोग तथा रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही उत्तर जोन के लिए भविष्य की नीतियां निर्धारित करने तथा किसानों को अधिक सामथ्र्यवान और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श होगा।एक प्रश्न के उत्तर में कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें लगभग साढ़े 11 लाख मीट्रिक टन यूरिया शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचा बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे यूरिया की खपत में लगभग 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकेगी।
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