लखनऊ 23 अप्रैल (आरएनएस )। नगर निगम लखनऊ में गुरुवार को आयोजित विशेष सदन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियमÓ को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नगर निगम मुख्यालय स्थित त्रिलोकनाथ सभागार में प्रात: 11 बजे प्रारम्भ हुई इस बैठक में पार्षदों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों की उपस्थिति रही। सदन के दौरान हालिया घटनाक्रम तथा महिला सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता के साथ विचार-विमर्श किया गया।सदन को संबोधित करते हुए लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने भावुक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह केवल महापौर के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सैनिक परिवार से जुड़ी महिला के रूप में भी यहां उपस्थित हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुशासन और स्वाभिमान उनके जीवन के मूल मूल्य रहे हैं, लेकिन बुधवार की सुबह उनके आवास पर हुई घटना ने लोकतंत्र और मानवता दोनों को आहत किया है।सदन के दौरान कई पार्षदों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पार्षद रेखा सिंह, नेहा सिंह, शिवम उपाध्याय, गौरी सांवरिया, ऋचा मिश्रा, भृगुनाथ शुक्ला तथा अनुराग मिश्रा (अन्नू) ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियमÓ के समर्थन में बोलते हुए महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सामाजिक सम्मान की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में महिलाओं को सम्मान और बराबरी का अधिकार मिलना समय की आवश्यकता है।महापौर ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि जिस देश में नदियों को ‘मांÓ कहा जाता है, वहां नारी के सम्मान को ठेस पहुंचाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मां, बहन और बेटी जैसे पवित्र रिश्तों का अपमान देश की जनता कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक मां होने के नाते वह किसी भी मां का अपमान करने की कल्पना भी नहीं कर सकतीं।उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया तथा महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विरोध कर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि अब देश की नारी जागरूक हो चुकी है और अपने अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी है।महापौर ने बुधवार को उनके आवास पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी नामपट्टिका पर जूता चलाना न केवल उनके पद का, बल्कि पूरे शहर की गरिमा का अपमान है। उन्होंने इसे लखनऊ की प्रथम नागरिक तथा एक सैनिक परिवार की महिला के सम्मान पर आघात बताया।सदन में इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसे 119 में से 93 पार्षदों ने सर्वसम्मति से पारित किया। महापौर ने इस समर्थन के लिए सभी पार्षदों तथा लखनऊ की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव नारी सम्मान के पक्ष में एक सशक्त संदेश है और उन लोगों के लिए जवाब है जिन्होंने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया।अंत में महापौर ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और नारी सम्मान की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लखनऊ की जनता न्याय और सम्मान के इस प्रयास में सदैव साथ खड़ी रहेगी।
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