अयोध्या 23 अप्रैल (आरएनएस)।भीषण गर्मी के इस दौर में पशुपालक किसानों को अपने मवेशियों की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एसपी सिंह ने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि बढ़ते तापमान का सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता पर पड़ता है, ऐसे में सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए उन्हें हरा चारा अवश्य खिलाएं और भूसे में पानी मिलाकर दें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। साथ ही प्रोटीन युक्त आहार और संतुलित पशु आहार देना चाहिए। आहार में नमक की मात्रा लगभग 2 प्रतिशत और मिनरल मिक्सचर की मात्रा 3 प्रतिशत तक रखना लाभदायक होता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि पशुओं को हमेशा छायादार स्थान पर रखें। यदि भैंस हैं तो उन्हें प्रतिदिन तालाब में छोडऩा चाहिए या सुबह-शाम नहलाना चाहिए। गाय और भैंस दोनों को नियमित रूप से ठंडे पानी से स्नान कराना गर्मी से राहत देता है। उन्होंने आहार लागत कम करने के लिए एजोला के प्रयोग पर भी जोर दिया। मुर्गी पालन करने वाले किसानों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि मुर्गियों को ताजा और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं तथा पत्तेदार हरा चारा खिलाएं। गुड़ और पानी का घोल भी दिया जा सकता है। पोल्ट्री शेड के आसपास जूट के बोरे लगाकर उन पर पानी का छिड़काव करने से तापमान नियंत्रित रखा जा सकता है। मछली पालन के संबंध में उन्होंने बताया कि तालाब में पानी की गहराई एक मीटर से कम नहीं होनी चाहिए, ताकि पानी का तापमान संतुलित बना रहे। वहीं भेड़ और बकरी पालन करने वाले किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने, प्रोटीन युक्त आहार देने और उन्हें छायादार स्थान पर रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि बाड़ों की दीवारों को जूट की बोरी से ढककर उस पर पानी का छिड़काव करने से अंदर का तापमान ठंडा बना रहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन उपायों को अपनाते हैं तो गर्मी के मौसम में भी पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और उत्पादन में कमी नहीं आएगी।
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