० हथियार छोड़े, मुख्यधारा चुनी — 47 माओवादी कैडर शांति और विकास की राह पर।
० बदलती बस्तर की तस्वीर — हिंसा से विश्वास और विकास की ओर लौटते माओवाद कैडर द्य
जगदलपुर, 25 अप्रैल (आरएनएस)। प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के 47 सशस्त्र कैडरों — जिनमें डीकेएसजेडसी सदस्य एवं दक्षिण बस्तर डीवीसी के प्रभारी हेमला विज्जा तथा पोडियम मनोज, डीवीसीएम एवं 9वीं प्लाटून (दक्षिण बस्तर डीवीसी) के कमांडर सहित अन्य महत्वपूर्ण कैडर शामिल हैं — द्वारा हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय वामपंथी उग्रवाद के अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
तेलंगाना में पुनर्वास हेतु आत्मसमर्पण करने वाले इन 47 कैडरों द्वारा 32 त्रह्म्ड्डस्रद्गस्र 2द्गड्डश्चशठ्ठह्य तथा 515 जीवित कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण करना न केवल संख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि उग्रवाद के अंत दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली है। बरामद हथियारों में 01 एलएमजी, 04 ए.के.-47 राइफल, 03 एसएलआर राइफल, 02 इंसास राइफल, 02 .410 मस्केट, 01 8 मिमी राइफल, 12 सिंगल शॉट गन, 01 9 मिमी पिस्टल, 01 रिवॉल्वर, 02 बीजीएल गन, 02 एयर गन तथा 01 एसबीबीएल गन शामिल हैं। वर्षों से भूमिगत रहकर माओवादी गतिविधियों में सक्रिय इन कैडरों द्वारा हथियारों सहित आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि हिंसा का मार्ग अब समाप्ति की ओर है और विश्वास तथा प्रगति का मार्ग प्रारंभ हो रहा है।
आज का यह आत्मसमर्पण पीएलजीए बटालियन, डीकेएसजेडसी तथा दक्षिण बस्तर डीवीसी की 9वीं और 30वीं प्लाटून से जुड़े कैडरों का है। इनमें 01 एससीएम/सीएम स्तर, 03 डीवीसीएम/सीवाईपीसीएम स्तर, 24 एसीएम/पीपीसीएम स्तर तथा 19 पार्टी सदस्य शामिल हैं। नेतृत्व स्तर से लेकर सक्रिय सशस्त्र कैडरों तक का इस प्रकार मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन के कमजोर होते ढांचे और उसके अंत की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
बस्तर सहित अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों, प्रशासनिक पहुंच के विस्तार तथा स्थानीय समुदायों की बढ़ती आकांक्षाओं ने ऐसा वातावरण निर्मित किया है जिसमें उग्रवाद की विचारधारा लगातार समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में कैडरों का हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करना इसी बदलती हुई वास्तविकता का प्रतीक है।
आज के इस घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दक्षिण बस्तर डीवीसी के लगभग सभी प्रमुख भूमिगत कैडरों और सशस्त्र कैडरों अब या तो आत्मसमर्पण कर चुके हैं अथवा निष्प्रभावी हो चुके हैं, जिससे संगठन की यह संरचना लगभग पतन के कगार पर पहुँच चुकी है।
पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, सुंदरराज पटलिंगम ने कहा कि यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवादी संगठन का अंत अब लगभग निश्चित हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों ने लंबे समय तक हिंसा और भय का वातावरण देखा है, वहां अब शांति, विकास और स्थिरता की दिशा में परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
आईजीपी, बस्तर ने क्षेत्र में शेष बचे कुछ गिने-चुने माओवादी कैडरों को अंतिम अवसर देते हुए अपील की कि वे बदलती परिस्थितियों को समझते हुए हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता और सभी संबंधित पक्षों के प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और माओवादी कैडर लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक पुनस्र्थापन का मार्ग खुला है, जबकि सुरक्षा बल क्षेत्र में शांति और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं।
पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, सुंदरराज पटलिंगम ने कहा कि संदेश स्पष्ट है — उग्रवाद का दौर समाप्ति की ओर है और भविष्य शांति, विकास तथा स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं का है।
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