ऽ कॉलेज प्रबंधक की याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, डीआईओएस को हटाने का दिया आदेश
ऽ शिक्षक की पुन: नियुक्ति में फंसे डीआईओएस ओ.पी. त्रिपाठी, फैसले के बाद मचा हड़कंप
पाटेश्वरी प्रसाद
बाराबंकी ,25 अपै्रल (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी के डीआईओएस ओ.पी. त्रिपाठी को तत्काल पद से हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई है। यह आदेश सीटी इंटर कॉलेज के प्रबंधक सरदार आलोक सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने दिया। बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को शहर स्थित सिटी इंटर कॉलेज में शिक्षक अभय कुमार की पुन: नियुक्ति में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने पूरे प्रकरण को गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच और कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। मामला रिट संख्या 14777/2025 (सी/एम, सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज, बाराबंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) से संबंधित है। याची संस्था की ओर से अधिवक्ता आकाश दीक्षित ने पैरवी की, जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता तथा अधिवक्ता पवन कुमार पांडेय उपस्थित रहे। मामले के अनुसार सहायक अध्यापक (संस्कृत) अभय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रबंध समिति की अनुमति के बिना छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित एकलव्य विद्यालय में प्रवक्ता पद ग्रहण कर लिया और बाद में पुन: पुराने संस्थान में ज्वाइन कर लिया। याची संस्था ने इसे अवैध बताते हुए न्यायालय में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, बाराबंकी (डीआईओएस) तथा प्रधानाचार्य द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के अभय कुमार को पुन: ज्वाइन कराया गया और अक्टूबर 2025 का वेतन भी जारी कर दिया गया जबकि अभय कुमार एकलव्य विद्यालय बीजापुर से 14 नवंबर 2025 को कार्यमुक्त हुआ था। न्यायालय ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर प्रशासनिक अनियमितता माना। न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के महानिदेशक को निर्देश दिया कि प्रधानाचार्य डॉ. शिव चरण गौतम, डीआईओएस ओ.पी. त्रिपाठी और शिक्षक अभय कुमार के विरुद्ध जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) से कम रैंक का न हो और आवश्यकता पडऩे पर विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा सके। यदि जांच में आपराधिक कृत्य पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ करने की छूट भी दी गई है। साथ ही क्प्व्ै ओ.पी. त्रिपाठी पर रिकॉर्ड में हेरफेर और झूठा हलफनामा देने के आरोपों को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त संयुक्त शिक्षा निदेशक, अयोध्या के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। न्यायालय ने अभय कुमार की पुनर्नियुक्ति को अवैध (दवद-मेज) घोषित करते हुए उनके द्वारा प्राप्त वेतन की वसूली संबंधित अधिकारियों से करने का निर्देश दिया है। अंतत: न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आदेशों के अनुपालन का निर्देश दिया और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायालयी आदेशों को ई-मेल एवं व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर बल दिया। इस निर्णय को शिक्षा विभाग में व्याप्त अनियमितताओं पर अदालत का कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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