रायपुर, 26 अप्रैल (आरएनएस)। माओवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में कथित मतांतरण गतिविधियों से जुड़े विदेशी फंडिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने ऐसी 153 संस्थाओं को जांच के घेरे में लिया है, जिन्हें विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही थी।
जांच में यह सामने आया है कि अमेरिकी मिशनरी संस्था से जुड़े खातों से बस्तर और धमतरी क्षेत्र में करीब साढ़े छह करोड़ रुपये एटीएम के माध्यम से निकाले गए। इसके बाद अन्य संबंधित संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच की जा रही है, जिन पर विदेशी धन के दुरुपयोग का संदेह है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ संस्थाओं पर आरोप है कि उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में प्रलोभन देकर मतांतरण कराने के लिए विदेशी राशि का उपयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत संगठनों की निगरानी कड़ी कर दी गई है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक प्रदेश में 364 गैर-सरकारी संगठन सक्रिय थे। जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद 84 संस्थाओं की फंडिंग रोक दी गई है, जबकि 127 संस्थाओं का पंजीयन निरस्त किया जा चुका है। राज्य के गृह विभाग द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अब ईडी इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि मामले में जल्द ही और बड़ी कार्रवाई हो सकती है। हाल ही में ईडी ने इस प्रकरण से जुड़े ठिकानों पर देश के छह राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया था। जांच के दौरान टीटीआई और उससे जुड़े संदिग्ध नेटवर्क की परतें खुली हैं। जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच डेबिट कार्ड के माध्यम से करीब 95 करोड़ रुपये देश में लाए जाने के संकेत मिले हैं।
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