मुंबई,05 मई (आरएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर में एक नाबालिग लड़की के रेप और मर्डर की घटना के बाद पूरे राज्य में गुस्से की लहर दौड़ गई है. इस बीच, मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस मामले पर विस्तार से चर्चा हुई; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधि एवं न्याय विभाग को यौन अपराध के आरोपियों को पैरोल देने पर सख्त रोक लगाने का निर्देश दिया है.
जानकारी के मुताबिक, दुष्कर्म और यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के आरोपियों को पैरोल न मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानूनों में बदलाव करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. विधि एवं न्याय विभाग को इस मामले में तात्कालिक आधार पर एक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
नसरापुर की घटना से पूरा राज्य हिल गया, जहां एक मासूम बच्ची पर यौन हमला किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई. यह भी पता चला है कि इस मामले में शामिल आरोपी एक आदतन अपराधी है जिसका पहले भी आपराधिक गतिविधियों का इतिहास रहा है. इस घटना ने कानून और व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह जांच शुरू हो गई है कि क्या कानून में कमियों की वजह से गंभीर अपराधों के आरोपियों को गलत छूट मिल जाती है.
कैबिनेट मीटिंग के दौरान, मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराधों के आरोपियों को कोई छूट नहीं दी जाएगी. पैरोल और फर्लो जैसे नियमों की फिर से जांच की जाएगी, और कानूनी बदलावों के जरिये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति लागू की जाएगी.
एक सरकारी समीक्षा से चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है कि यौन अपराधों के आरोपी लगभग 80 से 90 प्रतिशत ऐसे लोगहैं जिन्हें पहले भी इसी तरह के अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था, पैरोल पर रिहा किया गया था, और बाद में अपनी रिहाई के दौरान उन्होंने वही अपराध फिर से किए. इसलिए, पैरोल के बारे में ज्यादा सख्त रवैया अपनाने की जरूरत पर जोर दिया गया. इसके अलावा, 2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस के समय में, एक कानून बनाया गया था जिसमें कहा गया था कि ऐसे अपराधों के आरोपी व्यक्तियों को पैरोल नहीं दी जाएगी. यह कानून दो से तीन साल तक लागू रहा; हालांकि, बाद में कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अब विधि एवं न्याय विभाग को एक बार फिर ऐसा ही कानून बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, यह भी साफ किया गया कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी कि नसरापुर मामले के आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिले – जिसमें मौत की सजा भी शामिल है – और इसके लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ट्रायल चलाया जाएगा.
इस घटना के बाद, भोर और राजगढ़ इलाकों में पूरा बंद रहा. कई सामाजिक संगठन और नागरिक अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सड़कों पर उतर आए, और आरोपी को तुरंत और कड़ी सजा देने की मांग जोर पकड़ रही है. नसरापुर मामले के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार अब यौन अपराधों के खिलाफ ज्यादा कठोर रवैया अपना रही है. खास तौर पर, ऐसे आरोपियों को पैरोल न देने का प्रस्ताव भविष्य में होने वाले अपराधों को रोकने में एक अहम फैसला साबित हो सकता है.
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