कोलकाता,05 मई (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने आज मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर कई तरह के आरोप लगाए। उन्होंने ये भी कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। आमतौर पर चुनाव हारने के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हैं। आइए जानते हैं ममता ऐसा नहीं करेंगी, तो क्या हो सकता है।
ममता ने कहा, हम चुनाव हारे नहीं, हराए गए हैं। 100 सीटों पर वोटों की लूट हुई है। चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण था। प्रजातंत्र की हत्या की गई है। मुझे राजभवन क्यों जाना चाहिए? अगर मुझे शपथ लेनी होती, तो मैं चली जाती। उन्होंने कब्जा कर लिया है। क्या आपको लगता है कि मैं इस्तीफा दे दूं? मैं नहीं जाऊंगी। मैं सड़कों पर थीं और सड़कों पर ही रहूंगी।
भारतीय संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद राज्यपाल की मर्जी तक ही बना रहता है। राज्यपाल ही मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। संविधान का अनुच्छेद 164 कहता है कि जब कोई मुख्यमंत्री बहुमत या चुनाव हार जाता है, लेकिन इस्तीफा देने से मना कर देता है, तो राज्यपाल उसे पद से हटाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं। राज्यपाल एक आधिकारिक आदेश जारी कर वर्तमान सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग कर सकते हैं।
राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने और नए नेता को नियुक्त करने का अधिकार होता है। संवैधानिक परंपराओं के तहत, राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकते हैं। इसमें बहुमत साबित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। अगर मुख्यमंत्री बहुमत साबित नहीं कर सके, तो उन्हें हर हाल में कुर्सी छोडऩी होगी। पश्चिम बंगाल की संदर्भ में टीएमसी के पास केवल 80, जबकि भाजपा के पास 206 सीटें हैं।
किसी संवैधानिक संकट जैसे शासन-प्रशासन का विफल होना या सरकार बनाने में असमर्थ होने पर राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन लागू करने का भी विकल्प होता है। वे केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजकर अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की पूरी कमान सीधे केंद्र और राज्यपाल के हाथों में आ जाती है। मुख्यमंत्री की शक्तियां खत्म हो जाती हैं।
जानकारों का कहना है कि इस मामले में ममता के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। पूरा जिम्मा बहुमत के ऊपर रहता है। आपके पास बहुमत नहीं है, तो आपकी शक्तियां स्वत: ही चली जाती हैं। जानकारों का कहना है कि ममता इस्तीफा दें या न दें, इससे कोई फर्क नहीं पडऩे वाला, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है। इसके बाद ममता के पास अपने-आप ही कोई आधिकारिक पद नहीं रहेगा।
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