ऑटिज्म मुक्त भारत अभियान के तहत रांची में होगा एफएमटी थेरेपी लॉन्च
गर्भ से शुरू होती है ऑटिज्म की समस्या, बचाव के लिए जागरूकता जरूरी : डॉ. चंद्रशेखर
रांची 20 मई (आरएनएस)। रेस्पलाइज ऑटिज्म रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में संस्थापक अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर थोड़ीपुनूरी एवं पुष्पकला ने कहा कि हैदराबाद स्थित यह शोध प्रेरित संस्थान ऑटिज्म और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने वाला अपनी तरह का पहला स्वास्थ्य केंद्र है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान भारत का पहला ऐसा केंद्र है जो ऑटिज्म की रोकथाम के लिए गर्भधारण पूर्व देखभाल पर कार्य कर रहा है तथा ऑटिस्टिक बच्चों में गट-ब्रेन एक्सिस आधारित करुणामूलक उपचार के तहत फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (एफएमटी) थेरेपी भी उपलब्ध करा रहा है।संस्थान द्वारा 31 मई 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति में ऑटिज्म मरीजों के लिए निशुल्क गट हेल्थ असेसमेंट एवं माइक्रोबायोम टेस्टिंग कैंप का आयोजन किया जाएगा। पंजीकरण के लिए 8433529769, 8433529435 एवं 9100006552 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय सेठ तथा सी. प. सिंह होंगे। इस अवसर पर फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (एफएमटी) की औपचारिक लॉन्चिंग भी की जाएगी। डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि ऑटिज्म की शुरुआत गर्भावस्था से ही हो जाती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि समय रहते एहतियाती कदम उठाकर बच्चों और परिवारों को ऑटिज्म जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऑटिज्म के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से देश के विभिन्न शहरों में इस तरह के नि:शुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि संस्थान ने ऑटिज्म मुक्त भारत अभियान” तथा “सेव माइक्रोबायोम एंड सेव हेल्थ नामक दो राष्ट्रीय अभियान भी शुरू किए हैं, जिनके माध्यम से लोगों को ऑटिज्म और माइक्रोबायोम स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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