दुर्ग – भिलाई 1 जून (आरएनएस) भिलाई स्टील प्लांट से महीनों तक फ्लू डस्ट की आड़ में लोहे का स्क्रैप गायब होता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी, लेकिन दुर्ग पुलिस की पड़ताल ने इस संगठित चोरी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। अब इस बहुचर्चित मामले में दो और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने पहले ही छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था। विवेचना के दौरान सामने आया कि साईं एसोसिएट्स से जुड़े क्रेन ऑपरेटर इन्द्र कुमार पटेल (26 वर्ष), निवासी ठेठवार पारा छावनी तथा मदन साहू (24 वर्ष), निवासी डुमरडीह, उतई भी इस संगठित चोरी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। पुलिस को इनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पिछले चार से पांच माह से संगठित तरीके से बीएसपी के लौह स्क्रैप को फ्लू डस्ट परिवहन करने वाले वाहनों में छिपाकर बाहर भेज रहे थे। 26 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर अकलोरडीह स्थित ए.के. ट्रेडर्स परिसर में दबिश दी गई। यहां फ्लू डस्ट से भरे वाहनों में लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री पाई गई। मौके से लगभग 250 टन लौह स्क्रैप, कई भारी वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें बरामद की गईं।
पुलिस के अनुसार जब्त लौह स्क्रैप की कीमत करीब 90 लाख रुपये है, जबकि वाहनों और मशीनों सहित कुल जब्ती लगभग 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंकी गई है। पूछताछ में आरोपी रविन्द्र साहू ने मुख्य षड्यंत्रकर्ता संजय सिंह के निर्देश पर मैग्नेटिक क्रेन की मदद से बीएसपी का लोहा चोरी कर फ्लू डस्ट वाहनों में लोड करने की बात स्वीकार की है।
थाना पुरानी भिलाई में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा छत्तीसगढ़ औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 25 और 26(1) के तहत मामला दर्ज है। पुलिस अब भी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि उद्योगों की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले ऐसे संगठित गिरोह केवल संपत्ति नहीं चुराते, बल्कि देश की औद्योगिक व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाते हैं। दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे अपराधियों के लिए बड़ा संदेश है कि कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं।

