अयोध्या 5 जून (आरएनएस)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के पर्यावरण विज्ञान विभाग स्थित सरयू पर्यावरण प्रयोगशाला में आयोजित एक सप्ताहीय प्रशिक्षण कार्यक्रम परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी एवं विश्लेषण का समापन विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। समापन समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के प्रो. फर्रुख जमाल रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते वायु प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं तकनीकी दक्षता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राप्त प्रशिक्षण का उपयोग समाज एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण संभव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अयोध्या, लखनऊ, गोरखपुर, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, बस्ती, श्रावस्ती, बाराबंकी तथा कानपुर सहित विभिन्न जनपदों से आए लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी, पीएम10 एवं पीएम2.5 विश्लेषण, गैसीय प्रदूषकों की मॉनिटरिंग, सैंपलिंग तकनीकों, डेटा विश्लेषण, गुणवत्ता आश्वासन एवं गुणवत्ता नियंत्रण तथा आधुनिक उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों तथा पर्यावरणीय नियमों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वायु गुणवत्ता आकलन एवं पर्यावरणीय अनुसंधान के क्षेत्र में नई जानकारी और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ है। विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए प्रदेश भर से 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से केवल 60 प्रतिभागियों का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा नियमित रूप से पर्यावरणीय निगरानी, अनुसंधान, परामर्श सेवाओं तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। सरयू पर्यावरण प्रयोगशाला में उपलब्ध अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से वायु, जल एवं मृदा गुणवत्ता संबंधी अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं, जिनका लाभ शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं विभिन्न संस्थाओं को प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, वैज्ञानिक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंत में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य के संदेश के साथ किया गया।
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