नईदिल्ली,12 जून(आरएनएस)। फिनलैंड के दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान रूसी तेल खरीद को लेकर जानकारी दी और अमेरिका के रवैये को सवालों में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि देश ने कम कीमतों और उपलब्धता के कारण 2022 से रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया था और यह फैसला अमेरिका के अनुरोध पर लिया गया था, जो वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखना चाहता था।
जयशंकर ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अमेरिका ने पहले भारत से रूसी तेल खरीदने को कहा, फिर टैरिफ लगाए और बाद में उन्हें हटा भी लिया। उन्होंने कहा, हमें यह दिखावा नहीं करना चाहिए कि इसमें कोई बहुत बड़ा सिद्धांत शामिल है। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि लोग यह बात याद रखें। अमेरिका ने खास तौर पर भारत से रूसी तेल खरीदने के लिए कहा था ताकि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहे।
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर यूरोप की चिंता और रूस के प्रति अत्यधिक सहानुभूति दिखाने के सवाल पर कहा, मैं कीमत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदता हूं। उस समय, बाज़ार में ज़्यादातर तेल रूस का ही उपलब्ध था क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मध्य पूर्व से तेल खरीद रहे थे, जो हमारी पारंपरिक आपूर्ति थी। तो हालात ने हमें एक खास दिशा में धकेल दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी यूरोप को खतरे में नहीं डाला।
जयशंकर ने कहा, जहां तक नैतिक दुविधा की बात है तो किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन काश मैं भारत के मामले में यूरोपीय हथियारों के बारे में भी ऐसा कह पाता…यूरोपीय देश ऐसे हथियार बेचते हैं जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए किया जाता है। कई सालों से ऐसा हो रहा है। हम भारतीयों ने कभी भी यूरोप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं किया है।
जयशंकर ने यह बातें फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में उभरती हुई शक्तियां और नया भू-राजनीतिक मुकाबला विषय पर आयोजित कुलतारंता टॉक्स में की। फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और संयुक्त अरब अमीरात की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह पैनल चर्चा में थीं।
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