रायपुर, 22 जून (आरएनएस)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा शिक्षा मंत्रालय की स्पार्क ((SPARC) योजना के अंतर्गत ब्रेकिंग एंड सिक्योरिंग एआई: एडवर्सेरियल अटैक्स, डीपफेक्स एंड हेल्थकेयर सिस्टम्सविषय पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सोमवार को शुभारंभ हुआ। 22 से 26 जून 2026 तक आयोजित होने वाली यह कार्यशाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े उभरते सुरक्षा खतरों, डीपफेक तकनीकों, एडवर्सेरियल अटैक्स और स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के सुरक्षित उपयोग पर केंद्रित है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के डीजीपी गुरजिंदर पाल सिंह रहे। वहीं नेशनल स्पार्क कोऑर्डिनेटर एवं आईआईटी खडग़पुर के प्रोफेसर डॉ. रबीब्रत मुखर्जी, एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव, अमेरिका के सुनी पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट के डॉ. जाहिद अख्तर तथा ताइवान की नेशनल सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के डॉ. अरिजीत कराती विशेष रूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और पौधारोपण के साथ किया गया। कार्यशाला का समन्वयन डॉ. नरेश कुमार नागवानी और डॉ. प्रीति चंद्राकर कर रहे हैं। आयोजन में देश-विदेश से लगभग 100 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।एआई के साथ सुरक्षा और भरोसा भी जरूरी : डीजीपीमुख्य अतिथि डीजीपी गुरजिंदर पाल सिंह ने कहा कि एआई तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, लेकिन इसके साथ डीपफेक, एडवर्सेरियल अटैक्स और साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई आधारित प्रणालियों के उपयोग के साथ उनकी विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।वैश्विक शोध सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है स्पार्कआईआईटी खडग़पुर के प्रोफेसर डॉ. रबीब्रत मुखर्जी ने कहा कि स्पार्क योजना केवल एक अनुसंधान कार्यक्रम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अकादमिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। इससे भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर शोध और ज्ञान साझा करने के अवस मिलते हैं।डीपफेक और एडवर्सेरियल अटैक बड़ी चुनौतीएनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव ने कहा कि वर्तमान समय में डीपफेक और एडवर्सेरियल अटैक गंभीर चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं। विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में डेटा में मामूली बदलाव भी बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं। उन्होंने सुरक्षित और मजबूत एआई प्रणालियों के विकास पर जोर दिया।विशेषज्ञों ने सुरक्षित एआई पर दिया जोरअमेरिका के डॉ. जाहिद अख्तर ने कहा कि एआई अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और अब केवल शक्तिशाली मॉडल विकसित करने के बजाय उनकी सुरक्षा, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी ध्यान देना आवश्यक है। वहीं ताइवान के डॉ. अरिजीत कराती ने एआई प्रणालियों में संभावित छेड़छाड़ और सुरक्षा जोखिमों पर प्रकाश डालते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आधारित शोध को समय की आवश्यकता बताया।कार्यक्रम के अंत में डॉ. नरेश कुमार नागवानी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ एआई सुरक्षा, साइबर खतरों, डीपफेक पहचान और हेल्थकेयर सिस्टम्स में एआई के सुरक्षित उपयोग पर विभिन्न तकनीकी सत्रों में विचार साझा करेंगे।
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