नई दिल्ली ,22 जून(आरएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों में ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द होने से प्रभावित प्राइवेट छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक नई पॉलिसी बनाई है.यह मामला जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया.
बेंच सऊदी अरब के अल जुबैल के प्राइवेट कैंडिडेट प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ता ने सीबीएसई द्वारा ओरिजिनल मूल्यांकन स्कीम के अनुसार उनके 12वीं कक्षा के इम्प्रूवमेंट परीक्षा के नतीजे घोषित न करने को चुनौती दी थी.
सुनवाई के दौरान, केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक नई ऑल-इंडिया पॉलिसी बनाई गई है. उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित इसी तरह की स्थिति वाले छात्रों की चिंताओं का समाधान करेगी.
बेंच को बताया गया कि सात खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से मुख्य रूप से दो कैटेगरी के छात्र प्रभावित हुए. रेगुलर स्कूल के छात्र और प्राइवेट कैंडिडेट.मेहता ने कहा कि जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनके लिए प्राइवेट कैंडिडेट के 10वीं कक्षा और 12वीं कक्षा की पिछली बार दी गई बोर्ड परीक्षा में मिले मार्क्स के आधार पर परफॉर्मेंस का मूल्यांकन किया जाएगा.बेंच को बताया गया कि 21 जून को जारी नई पॉलिसी के तहत, बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले प्राइवेट छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक अलग फॉर्मूला तैयार किया गया था.
बेंच को बताया गया कि जिन विषयों की परीक्षा रद्द कर दी गई थी, उनके लिए मार्क्स इस तरह कैलकुलेट किए जाएंगे. क्लास दसवीं बोर्ड परीक्षा में मिले थ्योरी मार्क्स का 40 प्रतिशत और क्लास बारहवीं बोर्ड परीक्षा (जिसमें आखिरी बार शामिल हुए थे) में मिले थ्योरी मार्क्स का 60 प्रतिशत.
मेहता ने कहा कि प्राइवेट कैंडिडेट्स के साथ एक खास चुनौती यह थी कि उनके पास इंटरनल असेसमेंट (जैसे तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षा के मार्क्स) के स्कूल रिकॉर्ड नहीं थे, जो 27 मार्च की ओरिजिनल असेसमेंट स्कीम का आधार थे.
बेंच को बताया गया कि नई पॉलिसी के तहत पटेल को मिले मार्क्स उनके पिछले परफॉर्मेंस से बेहतर थे, और उन्हें ईमेल के ज़रिए रिजल्ट की जानकारी दी गई थी और इसे उनके डिजीलॉकर में अपडेट किया जाएगा.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विनीत जिंदल ने माना कि रिजल्ट घोषित कर दिया गया है, लेकिन कोर्ट से अपील की कि पटेल को आंसर स्क्रिप्ट की कॉपी पाने और सीबीएसई के नियमों के अनुसार री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) करवाने का अधिकार सुरक्षित रखा जाए.
बेंच ने मेहता की बात नोट की और मामले का निपटारा कर दिया. बेंच ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी कि अगर उन्हें कोई शिकायत हो तो वे कानून के अनुसार उपाय अपना सकते हैं.याचिका में, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि हालांकि सीबीएसई की 27 मार्च की असेसमेंट स्कीम रेगुलर स्टूडेंट्स के लिए थी, लेकिन इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल होने वाले प्राइवेट कैंडिडेट्स के बारे में कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया था, जिसके कारण उनका रिजल्ट रिजल्ट लेटर के तौर पर रोक दिया गया था.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विनीत जिंदल ने माना कि परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने शीर्ष अदालत से अपील की कि उनके मुवक्किल को उत्तर कुंजी की प्रति हासिल करने और बोर्ड के नियमों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन करवाने का अधिकार मिलना चाहिए. पीठ ने रिट याचिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है. पीठ ने साफ किया कि वह ऐसी कोई राहत नहीं दे सकती, जिसकी मांग ही न की गई हो.
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की बात रिकॉर्ड की और मामले का निपटारा कर दिया, साथ ही याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि अगर उसे कोई शिकायत हो तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है. सीबीएसई ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सात पश्चिम एशियाई देशों (बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं.
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