नई दिल्ली,25 जून(आरएनएस)। भारत मंडपम में दो दिवसीय इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो का आगाज हुआ. इसमें इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो में भारत की पहली देसी स्नाइपर राइफल से लेकर लेटेस्ट एआई से चलने वाले एंटी-ड्रोन व्हीकल तक, 300 से ज्यादा इनोवेशन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे. नेक्सजेन द्वारा आयोजित 11वां इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो, 10वें इंडिया होमलैंड सिक्योरिटी एक्सपो और 7वें ड्रोन इंटरनेशनल एक्सपो के साथ आयोजित किया गया.
दो दिवसीय एक्सपो में 25 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया. एक्सपो की शुरुआत 24 जून और समापन 25 जून को हुआ. इसमें टाइटो स्नाइपर राइफल, वराह काउंटर-ड्रोन सिस्टम, भारत की पहली एआई-पावर्ड एंटी-ड्रोन पेट्रोल गाड़ी, गरुड़ हाई-एल्टीट्यूड यूएवी, मॉड्यूलर एलएएमवी आर्मर्ड गाड़ी, स्ट्राइक ईगल लोइटर म्यूनिशन, रैपिड-रिस्पॉन्स मोटरबाइक एम्बुलेंस, एडवांस्ड मोबाइल डिटेक्शन और डीपफेक डिटेक्शन, एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी के लिए कटिंग-एज प्लेटफॉर्म आदि प्रदर्शित किए गए.
स्वदेशी टाइटो स्नाइपर राइफल स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए मील का पत्थर हैं. टाइटो दुनिया की पहली बोल्ट-एक्शन राइफलों में से एक है जिसका चैंबर 7.62&35 एमएम (.300 ब्लैकआउट) है, जिसे खास तौर पर शहरी और क्लोज-क्वार्टर स्नाइपिंग के लिए इंजीनियर किया गया है. इसका वजन भी मात्र 4.5 किलो है. जो अभी इस्तेमाल की जा रही स्नाइपर राइफल से करीब आधा है.
निर्माता कंपनी की ओर से मौजूद रोहित ने बताया कि वर्तमान में आर्मी या अर्ध सैनिक बलों द्वारा इस्तेमाल की जा रही स्नाइपर राइफल का वजन करीब 9 किलो है. जिसको साथ लेकर चलने में दिक्कत होती है. वहीं इस स्नाइपर राइफल को खोलकर के अलग अलग पार्ट्स में रखकर बैग में भी ले जाया जा सकता है और फिर असेंबल करके इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका इंटीग्रेटेड सप्रेसर और प्रोप्राइटरी डिजाइन डिफेंस आर एंड डी में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है, जिसमें हर कंपोनेंट देश में ही डिजाइन और बनाया गया है.
एक्सपो में इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) ने भी अपने जैमर और एंटी ड्रोन सिस्टम को प्रदर्शित किया. ईसीआईएल के सीनियर मैनेजर वीपी मिश्रा ने बताया कि हमारे एंटी ड्रोन सिस्टम में एआई इनबिल्ट है, जो ड्रोन का पता लगाकर जीपीएस सिग्नल के माध्यम से उसकी लोकेशन को भी ट्रेस करता है. करीब 10 किलोमीटर तक की रेंज में यह काम करता है. साथ ही ड्रोन किस रास्ते से गुजरा है वह भी बताता है.
एक्सपो में प्रदर्शित वराह काउंटर ड्रोन सिस्टम ने भारत के पहले कोहेरेंस-बेस्ड अकूस्टिक ड्रोन डिटेक्टर के तौर पर अपनी पहचान बनाई. रेडियो फ्रीक्वेंसी पर निर्भर रहने वाले पारंपरिक एंटी-ड्रोन सॉल्यूशन के उलट, वराह कई तरह के माइक्रोफोन का इस्तेमाल करके दुश्मन ड्रोन का पता लगाता है और उन्हें उनके प्रोपेलर की आवाज से पहचानता है, जिसमें रडार या आरएफ -बेस्ड डिफेंस के लिए साइलेंट ड्रोन भी शामिल हैं. वराह 500 मीटर पर माइक्रो-ड्रोन और कई किलोमीटर पर बड़े यूएवी की पहचान कर सकता है, जो काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन के लिए एक बड़ी सफलता है.
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