0 सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बीजापुर, 03 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) के पासेवाड़ा कोर एरिया में दो बाघों के कथित शिकार की सूचना से वन्यजीव संरक्षण तंत्र में हड़कंप मच गया है। मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने तथा बाघों की खाल बरामद होने की चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, वन विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक और विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, ग्रामीणों और सुरक्षा एजेंसियों को मिली सूचनाओं के आधार पर मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद जांच शुरू की गई और कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि, आधिकारिक बयान सामने नहीं आने से घटना की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह की आशंका
जानकारों का मानना है कि घटना के पीछे किसी अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह का हाथ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाहरी लोगों की गतिविधियों की सूचनाएं मिल रही थीं। यदि जांच में इस तरह के नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो यह वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती होगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
कथित घटना के बाद टाइगर रिजर्व की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि कोर एरिया जैसे अत्यंत संरक्षित क्षेत्र में बाघों का शिकार संभव हुआ है, तो सुरक्षा व्यवस्था और गश्त प्रणाली की प्रभावशीलता की समीक्षा आवश्यक है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों को पहले से किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी थी और उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
संरक्षण प्रयासों को झटका
इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है, जहां बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए वर्षों से व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि दो बाघों के शिकार की पुष्टि होती है, तो इसे संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल मामले की जांच जारी है। वन विभाग की आधिकारिक पुष्टि और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाघों के शिकार की घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसमें कौन लोग शामिल थे और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई या नहीं।
इस मामले के बाद सभी की निगाहें वन विभाग और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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