अंबिकापुर/कोरिया, 07 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में यातायात नियमों के पालन संबंधी जन-जागरूकता पर किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित और ‘ट्रैफिक मैनÓ के नाम से प्रसिद्ध हवलदार डॉ. महेश मिश्रा को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर ने डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की है।

डॉ. मिश्रा ने यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन : छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ में विषय पर अपना शोध पूरा किया। इस शोध में कोरिया जिले के नागरिकों और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की स्थिति, सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों तथा सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उपायों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह शोध सड़क सुरक्षा और जन-जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।
डॉ. महेश मिश्रा ने वर्ष 2019 में प्री-पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2021-22 में कोर्सवर्क पूरा करने के बाद 2023 में शोध शीर्षक का पंजीयन कराया। सात वर्षों के अध्ययन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण और वैज्ञानिक शोध पद्धति के आधार पर उन्होंने अपना शोध कार्य पूर्ण किया तथा जून 2026 में अंतिम वाइवा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
शोध कार्य का निर्देशन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा ने किया, जबकि बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. महेश शुक्ला ने शोध का मूल्यांकन करते हुए इसे समाजोपयोगी और वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों के प्रति जागरूकता मानव जीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह शोध समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
डॉ. मिश्रा का शोध केंद्र शासकीय राज मोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर रहा, जहां उन्हें शोध कार्य के दौरान शैक्षणिक एवं संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ।
पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद डॉ. महेश मिश्रा ने अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शोध मार्गदर्शक, सहकर्मियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा शोध में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. महेश मिश्रा पिछले दो दशकों से यातायात जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत व्यय पर 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविरों का आयोजन कर 5 लाख से अधिक लोगों को यातायात नियमों, संकेतों और सड़क सुरक्षा की जानकारी दी है। व्यापक स्तर पर चलाए गए इस अभियान के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्र्स में भी दर्ज है।
उनकी इस उपलब्धि पर सहकर्मियों, मित्रों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। माना जा रहा है कि उनका यह शोध सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और यातायात अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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