दंतेवाड़ा, 10 जुलाई (आरएनएस )। छत्तीसगढ़ के तीन राज्यों की सीमा में फैले बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार पर्यटकों के लिए सफारी शुरू होने जा रही है। करीब 40 साल तक नक्सलियों की मौजूदगी के कारण बंद रहे इस क्षेत्र में अब शांति बहाल होने के बाद इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी है। बरसात के बाद यह रिजर्व पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब 2799 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसे 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। लंबे अंतराल के बाद क्षेत्र नक्सल-मुक्त होने से पर्यटकों की राह आसान हुई है। वन विभाग ने यहां इको-टूरिज्म को फिर से शुरू करने के लिए व्यापक योजना बनाई है। पर्यटक अब यहां बाघ, तेंदुआ, वन भैंसा, गिद्धों का झुंड सहित कई अन्य जीव देख सकेंगे। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों की मौजूदगी के कारण पहले इस क्षेत्र में आम लोगों का आना-जाना संभव नहीं था। अब बस्तर नक्सल-मुक्त होने के बाद आईटीआर में आम लोग जा सकेंगे। जो नक्सली पहले यहां जाने से रोकते थे, उन्हें ही प्रशिक्षण देकर गाइड बनाया गया है। समर्पण कर चुके नक्सलियों को इस क्षेत्र की पूरी जानकारी है। उन्हें जल्द गाइड के रूप में तैयार किया जाएगा। दूसरी जंगल सफारियों की तरह यहां भी पर्यटकों को जिप्सी मिलेंगी। इंद्रावती रिजर्व में बाघों की गणना जारी है। प्रदेश में करीब 19 बाघ हैं। यह इलाका घने साल के जंगलों, मिश्रित वन, विशाल जलग्रहण क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, दुर्लभ वन भैंसा, गिद्ध, कई जंगली जानवर, पक्षी मौजूद हैं। योजना के अनुसार इंद्रावती नदी के तटों पर पर्यटन ग्राम विकसित किए जाएंगे। रिजर्व को विकसित करने के लिए दो प्रमुख प्रवेश द्वार तय किए गए हैं। पहला प्रवेश कुट्रू-फरसगढ़ क्षेत्र से होगा। दूसरा प्रवेश भोपालपट्टनम के पास माड़मका क्षेत्र से होगा। अधिकारियों का कहना है कि रिजर्व के अन्य क्षेत्रों को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है। बस्तर में स्थित आईटीआर में आदर्श राष्ट्रीय उद्यान की सभी विशेषताएं हैं। यहां विशाल घासलैंड, जल संरचनाएं और बांस के जंगल हैं। समृद्ध जैव विविधता इस रिजर्व की पहचान है। वन विभाग का मानना है कि इको-टूरिज्म से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और संरक्षण को भी बल मिलेगा। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संदीप बलगा ने बताया कि क्षेत्र में सुरक्षा के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए गए हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे पर काम चल रहा है। सफारी शुरू होने से बीजापुर और आसपास के इलाकों में पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। 40 साल बाद खुल रहे इस जंगल में सफारी न सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण होगी, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास और शांति का भी संदेश देगी। वन विभाग को उम्मीद है कि इंद्रावती जल्द ही छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल होगा।
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