नईदिल्ली,14 जुलाई। भारत की थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) दर जून, 2026 में बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में यह 9.68 प्रतिशत थी, जबकि विशेषज्ञों ने इसके 9.15 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। थोक महंगाई अब दोहरे अंक के बेहद करीब पहुंच गई है। सरकार के अनुसार, खाद्य वस्तुओं, धातुओं और रसायनों की बढ़ती कीमतों ने थोक स्तर पर महंगाई को ऊपर बनाए रखा।
जून में खाद्य वस्तुओं की महंगाई सबसे तेजी से बढ़ी।
डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक मई के 4.49 प्रतिशत से बढ़कर जून में 6.14 प्रतिशत पहुंच गया। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई भी 4.99 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई।
महीने के दौरान खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 3.75 प्रतिशत और गैर-खाद्य वस्तुओं में 1.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे बाजार में थोक कीमतों पर दबाव और अधिक बढ़ गया।
ईंधन और बिजली श्रेणी की महंगाई जून,म 2026 में घटकर 27.41 प्रतिशत रह गई, जो मई महीने में 30.33 प्रतिशत थी।
हालांकि, पेट्रोलियम और खनिज तेल से जुड़े उत्पाद अब भी महंगे बने हुए हैं। वहीं विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही।
धातु, रसायन, खाद्य उत्पाद और मशीनरी जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उद्योगों की लागत ऊंची बनी रही।
सरकार ने जून के आंकड़े नई डब्ल्यूपीआई सीरीज के आधार पर जारी किए हैं, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।
नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है और सौर, पवन तथा परमाणु बिजली जैसे नए उत्पाद भी शामिल किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था मौजूदा अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर पेश करेगी और थोक महंगाई का अधिक सटीक आकलन करने में मदद करेगी।
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