० महुए के सीजन में आगजनी की घटनाएं रोकने की सार्थक पहल
शैलेन्द्र ठाकुर
दंतेवाड़ा, 13 मार्च (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगे गांव बालूद में आज एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने गांव के युवाओं की जागरूकता और साहस को सबके सामने ला दिया। गांव के जंगल में अचानक आग लग गई थी, लेकिन समय रहते युवाओं ने मिलकर आग पर काबू पा लिया और एक बड़े नुकसान को होने से बचा लिया। मिली जानकारी के अनुसार, गांव का एक युवक रोज की तरह अपने काम से घर लौट रहा था। रास्ते में उसने देखा कि जंगल के एक हिस्से में आग लगी हुई है और धीरे-धीरे फैल रही है। स्थिति को गंभीर समझते हुए उसने तुरंत बालूद गांव की युवा टीम को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही बालूद के युवा, जो अपने-अपने काम से थके हुए और भूखे-प्यासे घर लौट रहे थे, बिना देर किए सीधे जंगल की ओर दौड़ पड़े। किसी ने अपनी थकान की परवाह नहीं की, किसी ने भूख-प्यास नहीं देखी।
उनके मन में केवल एक ही भावना थी—अपने गांव और जंगल को बचाना। युवाओं ने मिलकर कड़ी मेहनत और साहस के साथ आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। टहनियों, मिट्टी और उपलब्ध साधनों की मदद से उन्होंने आग को फैलने से रोका और काफी हद तक बुझाने में सफलता प्राप्त की। यदि युवाओं की यह तत्परता और साहस न होता, तो जंगल को भारी नुकसान हो सकता था। रात करीब 08:30 बजे लगभग 20-25 युवा कच्चे रास्ते के सहारे अपनी-अपनी बाइक से जंगल की ओर निकल पड़े। रास्ते में डंकनी नदी आने पर युवाओं ने अपनी बाइक नदी किनारे खड़ी कर दी और हिम्मत दिखाते हुए नदी पार कर जंगल की ओर बढ़ गए। मौके पर पहुंचकर सभी युवाओं ने मिलकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। किसी ने पानी डालकर आग को रोकने की कोशिश की, तो किसी ने पेड़ों की टहनियों से आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया। बड़े नुकसान को टाला काफी मेहनत और साहस के बाद युवाओं ने मिलकर आग पर 2 – 3 घंटों में काबू पा लिया और जंगल को बड़ी क्षति होने से बचा लिया। हालांकि, युवाओं के अनुसार आग की चपेट में आने से एक जंगली सूअर के मरने की आशंका जताई जा रही है और कई पक्षियों के भी मरने की संभावना बताई जा रही है। वहीं युवाओं ने अपनी कोशिशों से कई अन्य छोटे-बड़े जीव-जंतुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर बचाने का काम भी किया। ग्रामीणों ने सराहा गांव के लोगों ने युवाओं के इस साहस, एकजुटता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना की खूब सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे ही गांव के युवा हमेशा जागरूक रहेंगे, तो हम अपने जंगल, पर्यावरण और वन्य जीवों को सुरक्षित रख सकते हैं। हालांकि, गांव में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन युवाओं के प्रयासों की सराहना करने के बजाय उनकी आलोचना करते हैं और इस टीम से जुडऩे से भी हिचकते हैं। लेकिन गुरुवार की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि संकट के समय यही युवा सबसे पहले गांव की रक्षा के लिए खड़े नजर आते हैं।
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