लालगंज, मीरजापुर 14 नवंबर (आरएनएस)। तहसील परिसर में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने ग्राम न्यायालय के स्थायी भवन के लिए जमीन चयन में हो रही देरी पर तीखी नाराजग़ी जताई। वकीलों का कहना है कि वर्षों से न्यायालय ब्लॉक भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है लेकिन प्रशासन अब तक मानक के अनुसार भूमि तय नहीं कर पाया। इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ता एकजुट हुए और जमीन उपलब्ध कराने को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग पर सहमति बनी।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र दत्त त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि ग्राम न्यायालय का अपना भवन ग्रामीण न्याय व्यवस्था के लिए अनिवार्य है। नींव की जमीन ही तय नहीं है। ऐसे में भवन निर्माण की बात करना औपचारिकता भर है।वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र दत्त द्वितीय ने कहा कि ग्राम न्यायालय को अस्थायी भवन में चलाना न्याय की गरिमा के विपरीत है। भूमि चयन में लगातार टालमटोल हो रही है। प्रशासन को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा।उपरौध अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष अशोक मिश्रा ने बताया कि ग्राम न्यायालय का सर्वे और सत्यापन जिला जज अरविंद मिश्रा द्वारा पूरा कर लिया गया है लेकिन भूमि मानक पर खरा न उतरने से आगे की प्रक्रिया अटक गई है। उन्होंने तहसील प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की।वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाशपति त्रिपाठी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की मजबूती ज़मीन से शुरू होती है। इसलिए ग्राम न्यायालय के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।अधिवक्ता धनेश्वर गौतम ने भी भूमि उपलब्ध कराने का मामला उठाते हुए कहा कि देरी से ग्रामीणों की न्याय तक पहुंच प्रभावित हो रही है।अधिवक्ता राजकुमार पांडे ने कहा कि ग्राम न्यायालय का निर्माण ग्रामीण अधिकारों की बुनियाद से जुड़ा विषय है। हम बार-बार मांग कर रहे हैं लेकिन जमीन तय न होने से न्यायिक ढांचा कमजोर पड़ रहा है।अधिवक्ता राकेश दुबे ने कहा कि अस्थायी भवन में कार्य करना कई सीमाएं पैदा करता है। प्रशासन को अब फ़ाइलों से बाहर आकर जमीन पर समाधान देना ही होगा।बैठक में निहाल खान, आशीष सिंह, हृदय यादव, शिवम पांडे, विपिन तिवारी, देवेंद्र नाथ चतुर्वेदी, तथा गुना में रसूल, उमाशंकर, आलोक त्रिपाठी, उज्जवल दुबे, विजय शंकर सहित कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

