—- ग्राम सभा तरया लच्छीराम में तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ एव प्रज्ञा पुराण कथा का हुआ समापन।
कुशीनगर, 15 नवम्बर (आरएनएस)। माँ गायत्री, सद्बुद्धि की देवी है, इनके भजन पूजन से व्यक्ति सदाचारी बनता है।
यह विचार जनपद के तरया सुजान थाना क्षेत्र के ग्राम तरया लच्छीराम में हो रहें पंच कुंडीय नव चेतना जागरण गायत्री महायज्ञ एव प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान शांति कुंज हरिद्वार से आए कथा वाचक धनन्जय शास्त्री ने कथा पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रज्ञा पुराण की कथा हमें मानवता एवं मानव से आपसी मेल सिखाती है। इसमें कोई जाति बंधन कोई रोक नहीं। गायत्री परिवार सबको अपना मानता है और हमेशा मनुष्य के कल्याण के लिए काम करने को तैयार रहता है। उन्होंने माँ गायत्री की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जिस पर माँ गायत्री की कृपा हो जाती है उसके सारे काम स्वयं हो जातें हैं। विचारों में शुद्धता आ जाती है व्यक्ति मानवता के पथ पर बढने लगता है और पूरी दुनिया में उसका नाम हो जाता है, इसलिए माँ गायत्री की महिमा अपरंपार है। कथा के दौरान उन्होंने बीच बीच में एक से एक सुंदर और संगीतमय उदाहरण प्रस्तुत किये जो श्रोताओं को रोचक और अनुकरणीय लगे। कथा के दौरान मुख्य रूप से आयोजक मंडल के बैजनाथ मिश्रा, कृष्ण मोहन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार संयोग श्रीवास्तव, ओम प्रकाश चौबे, राकेश श्रीवास्तव, बृज बिहारी श्रीवास्तव, विवेक मिश्रा, पूर्व प्रधान डा सुबोध श्रीवास्तव, सुबास गुप्ता, मुकुंद प्रसाद, बृजकिशोर मिश्रा, सुधाकर श्रीवास्तव, मोतिलाल, बेचू गोड, कृष्णा मिश्रा, अवध बिहारी खरवार सहित अनेक लोग उपस्थित रहें।
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