जौनपुर १६ नवंबर (आरएनएस )। कांग्रेस के पूर्व विधायक नदीम जावेद ने बिहार चुनाव में इंडियाश् गठबंधन की हार का प्रमुख कारण चुनाव में धांधली को बताया है। उन्होंने रविवार को यह आरोप लगाया। जावेद ने कहा कि राज्य की स्थिति को देखते हुए कांटे की टक्कर की उम्मीद थी।उन्होंने २०२० के विधानसभा चुनाव का हवाला दिया, जिसमें इंडियाश् गठबंधन और एनडीए के बीच केवल १२,००० वोटों का अंतर था। इस बार के जनादेश को अप्रत्याशित बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक पंडित या एग्जिट पोल ने इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं की थी। अपने दावे के समर्थन में, नदीम जावेद ने राहुल गांधी के बयानों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने दो बार पत्रकार वार्ता कर बेंगलुरु की लोकसभा और विधानसभा सीटों पर फर्जी मतदाताओं के बारे में जानकारी दी थी, जहां एक विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से अधिक फर्जी मतदाता पाए गए थे।जावेद ने हाल ही में हरियाणा में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस चुनाव में पूरे राज्य में श्इंडियाश् गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच २२,००० वोटों का अंतर था, जबकि राहुल गांधी ने २५ लाख फर्जी मतदाताओं का डेटा प्रस्तुत किया था।नदीम जावेद के अनुसार, इस डेटा से साफ तौर पर यह बात सामने आई है कि भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में धांधली करके हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने में सहयोग किया। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बिहार में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में जितने लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, उस पर आधारित एक शोध और डेटा जल्द ही जारी किया जाएगा। कांग्रेस नेता ने एनडीए के जनादेश को सत्य के आसपास नहीं बताया और दावा किया कि इसमें कुछ एक्स्ट्रा डोज डाली गई है, जिसके कारण एनडीए को इतना बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ है।लालू यादव की बेटी रोहिणी यादव के मामले पर पूछे जाने पर नदीम जावेद ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह उनके घर का निजी मामला है और इसमें कुछ कहना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी के व्यक्तिगत मामलों में दखल नहीं देते हैं और केवल राजनीतिक प्रश्नों पर ही प्रतिक्रिया देंगे।
ओवैसी के इस बयान पर कि भाजपा को रोकना सिर्फ मुसलमानों का काम नहीं है, नदीम जावेद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस देश की महान जनता ने समय-समय पर भारतीय जनता पार्टी और उनके विचारों के साथ-साथ ओवैसी के विचारों को भी रोकने का काम किया है।
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