जौनपुर 17 नवंबर (आरएनएस )। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्ववाधान में’नि:शुल्क वृद्धजन आवास वृद्धाआश्रम सैयद अलीपुर सदर में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय/सचिव प्रशांत कुमार सिंह के द्वारा बालक वृद्ध एवं वयस्क का अंतर बताते हुए बताया कि माता-पिता के भरण पोषण का भार वयस्क पुत्र पुत्री उनकी अनुपस्थिति में पौत्र और पौत्री एवं दत्तक पुत्र का होता है यदि कोई परेशानी भोजन वस्त्र आवास रहन-सहन मनोरंजन एवं आपातकालीन परेशानी में हो तो संबंधित अधिकारियों को सूचित करें अन्यथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रार्थना पत्र दें उन्होंने भरण पोषण की प्रक्रिया को सरल बताते हुए कहा कि एक आवेदन पत्र पर त्वरित रूप से इसका निस्तारण 90 दिन में हो जाता है अधिक से अधिक 30 दिन उसमें और बढ़ाया जा सकता है यदि वृद्ध पति पत्नी दोनों एक साथ रह रहे हैं तो एक की मृत्यु हो जाने पर भी पूरी राशि दूसरे को मिलती रहेगी यदि विदेश में हो तो भी भीम का अनुपालन इस तरह होगा उन्होंने भरण पोषण की अधिनियम की धारा 7 का वर्णन करते हुए कहा कि यह सभी धर्म पर लागू होता है उपस्थित वृद्धजनों ने वृद्ध आश्रम की व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल ने कहा कि वृद्ध आश्रम में आरामदायक कमरे नियमित पौष्टिक भोजन स्वास्थ्य देखभाल मनोरंजन की नि:शुल्क व्यवस्था राज्य सरकार को करनी पड़ती है । उन्होंने बताया इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पेंशन योजना में रु0 1000 तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम में रु0 200 प्रतिमा सहायता दी जाती है यदि 80 से ऊपर है तो उनकी सहायता राशि और बढ़ सकती है। काउंसलर शिल्पी जायसवाल द्वारा बंदियों को पौष्टिक आहार और फल का वितरण किया गया ।
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