आरएनएस 21नवम्बर 2025 अनेक देशों में जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) का उभरता आक्रोश केवल युवाओं की उच्छृंखल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सरकारों की असफलता, अपारदर्शिता और बढ़ते सामाजिक-आर्थिक असंतोष का संकेत है। नेपाल में पिछले लगभग 70 दिनों से जारी जन-आंदोलन इस सच को और स्पष्ट करता है। जेन जी के नेतृत्व में हुए व्यापक प्रदर्शनों ने पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर जरूर कर दिया, परंतु नई अंतरिम सरकार भी युवाओं की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है।
नेपाल में जेन जी आंदोलन की मुख्य मांगें—भ्रष्टाचार का पूर्ण अंत, शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, शीघ्र चुनाव, संसद का पुनर्गठन और संविधान में सुधार—अब तक अधूरी हैं। यही कारण है कि सरकार बदलने के बावजूद जन असंतोष शांत नहीं हुआ है। सेना को शांति-व्यवस्था संभालनी पड़ी और लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच कर्फ्यू, लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हालिया झड़पों से साफ है कि युवा वर्ग का विश्वास शासन से टूटा है और आक्रोश और गहरा हुआ है।
सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध, बढ़ती बेरोजगारी, भाई-भतीजावाद और सरकारी वादों पर अमल न होने से युवाओं की निराशा तेजी से बढ़ी है। उच्च शिक्षा प्राप्त, तकनीकी रूप से सक्षम और सूचनाओं तक त्वरित पहुंच रखने वाली यह पीढ़ी अब सिर्फ नाराज़ नहीं, बल्कि परिवर्तन के लिए मुखर रूप से संगठित है।
सत्ता परिवर्तन के बाद युवाओं को उम्मीद थी कि नई सरकार उनकी आकांक्षाओं को प्राथमिकता देगी, लेकिन जब बुनियादी मुद्दों में सुधार दिखाई नहीं दिया, तो जेन जी का असंतोष और तीव्र हो गया। नेपाल में यह आंदोलन युवा नेतृत्व, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को नए स्तर पर स्थापित कर रहा है।
नेपाल ही नहीं, बांग्लादेश, श्रीलंका और केन्या जैसे देशों में भी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक असमानता और सरकारी अपारदर्शिता के कारण जेन जी का असंतोष बढ़ रहा है। श्रीलंका और नेपाल में सरकारों का गिरना इस बात का प्रमाण है कि युवा आक्रोश लोकतांत्रिक व्यवस्था को झकझोरने की क्षमता रखता है।
डिजिटल युग में पली-बढ़ी यह पीढ़ी सामाजिक अन्याय, पर्यावरण संकट और पुरानी राजनीतिक संरचनाओं के प्रति संवेदनशील है। जब उच्च कौशल के बावजूद भविष्य अनिश्चित दिखता है, तो असंतोष स्वाभाविक रूप से आंदोलन में बदल जाता है।
नेपाल में पिछले दो दिनों के घटनाक्रम ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि युवा पीढ़ी की मांगें अगर अनदेखी की गईं, तो अस्थिरता और बढ़ सकती है। सरकार के लिए यह संकेत है कि पारदर्शिता, मेरिट आधारित व्यवस्था, रोज़गार के अवसर और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं।
जेन जी का बढ़ता आक्रोश वास्तव में शासन प्रणालियों के लिए चेतावनी है—यदि अपेक्षाएं पूरी नहीं होंगी, तो लोकतंत्र भी दबाव और असंतोष से अछूता नहीं रह पाएगा।

