नई दिल्ली 24 Nov, (Rns): यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट द्वारा आज मुख्य शाहदरा चौक पर धरना प्रदर्शन किया गया और इस मांग को लेकर एक ज्ञापन उपराज्यपाल जम्मू-कश्मीर को प्रेषित कर इसकी प्रतियां मा. राष्ट्रपति भारत, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, गृहमंत्री भारत सरकार, शिक्षामंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर और सीईओ श्राईन बोर्ड को भेजा गया। धरना प्रदर्शन की अगुवाई यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रवादी शिवसेना श्री जय भगवान गोयल जी कर रहे थे। इस अवसर पर श्री गोयल ने कहा कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों की जो चयन सूची जारी हुई है, उसमे से 42 सीटें मुस्लिम समुदाय के छात्रों को आबंटित की गई हैं उससे व्यापक असंतोष, चिंताएँ तथा अनेक संगठनों में विरोध पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट, जिसमे अल फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की आतंवादी संगठनों के साथ सम्बन्धो की पुष्टि हुई है और कई डॉक्टर पकड़े भी गए है और जांच एजेंसियों से चौकाने वाली ये जानकारी भी पकड़े हुए आतंकी डॉक्टरों से मिली है कि ये लोग फिलीस्तनी संगठन हमास की तर्ज पर ड्रोन और रोकिट से हमले की साजिश भी कर रहे थे। हमारा ये मानना है कि ये मुस्लिम समुदाय के लोग हमारे हिन्दुओं के पैसे से ही चल रहे मेडिकल संस्थान में डॉक्टर बनकर हमारे हिन्दू लोगो के लिए मौत के सौदागर बनकर मेडिकल कॉलेज से निकलेंगे। श्री गोयल ने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा अल फलाह यूनिवर्सिटी से पकड़े गए डॉ. प्रोफेसरों के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में कई डॉक्टरों के लॉकरों से नाजायज हथियार बरामद हुए हैं, जांच में यह भी बात सामने आया है कि यह लोग हमास और गाजा की तरह ऊपर हॉस्पिटल नीचे आतंकियों के बंकर बनाने का षड़यंत्र रच रहे थे ताकि अगर कल को हमारी सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के बंकरों पर अटैक करे तो यह लोग पूरी दुनिया को यह मैसेज दे सकें के भारत की सुरक्षा एजेंसियां आम नागरिकां/मरीजां, बिमारों पर अटैक कर मानव अधिकारां का खुलेआम हनन कर रही हैं।
गोयल ने कहा कि जैसा कि सर्वविदित है यह मेडिकल कॉलेज हिंदू समाज के दान, श्रद्धा और योगदान के आधार पर स्थापित व संचालित है। करोड़ों श्रद्धालुओं के अर्पण, दान एवं धार्मिक योगदान के माध्यम से ही यह संस्थान खड़ा हुआ है और इसके संचालन, आधारभूत संरचनाओं तथा सेवाओं का वित्तपोषण होता है।
गोयल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जब किसी धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थान का संचालन किसी विशेष समुदाय के दान से होता है, तो उस समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक गरिमा और हितों का संरक्षण राज्य का दायित्व है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया भी संस्थान के धार्मिक एवं सांस्कृतिक चरित्र के अनुरूप होनी चाहिए।
गोयल ने कहा कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का भी यह उद्देश्य रहा है कि श्राइन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण की गरिमा बनी रहे तथा इससे जुड़े संस्थानों में वही मर्यादाएँ और अनुशासन पालन किया जाए जो देवी मां के पवित्र धाम से अपेक्षित हैं। इन परिस्थितियों में करोड़ों श्रद्धालु एवं अनेक संगठन चिंतित हैं कि संस्थान का मूल उद्देश्य, दान की भावना और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित न हो इसलिए हमारी पुरजोर मांग है कि तत्काल 42 मुस्लिम छात्रों का चयन रद्द कर हिन्दू छात्रों को दिया जाएं। दानकर्ता समुदाय (Hindu Donor Community) के हितों की रक्षा हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए, जैसा कि हाई कोर्ट ने भी सुझाव दिया है। श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित संस्थानों में Donor Preference Policy लागू की जाए, ताकि दानकर्ता समुदाय का अधिकार सुरक्षित रहे।

