सुकमा, 26 नवम्बर (आरएनएस)। जिले में ऑयल पाम की वाणिज्यिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-पाम के अंतर्गत सुकमा जिले को 150 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसमें से अब तक 88 हेक्टेयर क्षेत्र में पौध रोपण संपन्न हो चुका है। किसानों में इस फसल के प्रति रूचि लगातार बढ़ रही है तथा 35 किसानों का 62 हेक्टेयर क्षेत्र चयनित कर लिया गया है, जहाँ आगामी दिनों में रोपण किया जाएगा। विभागीय अधिकारी कमल गावड़े ने बताया कि ऑयल पाम का पौधा तीसरे से चौथे वर्ष में फल देना शुरू कर देता है और लगभग 25 से 30 वर्षों तक लगातार उत्पादन देता है। बाजार में पॉम ऑयल का भाव 18 से 20 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। एक हेक्टेयर से औसतन 20 टन उत्पादन प्राप्त होता है, जिससे किसान को प्रतिवर्ष ढाई से तीन लाख रुपये तक की नियमित आय का अनुमान है। केंद्र सरकार द्वारा ऑयल पाम को प्रोत्साहित करने हेतु किसानों को व्यापक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें रोपण सामग्री (इंडीजिनस) हेतु 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, रोपण सामग्री (एक्जॉटिक) हेतु 29,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, रख-रखाव अनुदान प्रथम चार वर्षों तक 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष, अंतरवर्तीय फसल हेतु अनुदान प्रथम चार वर्षों तक 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष, बोरवेल निर्माण हेतु 50,000 रुपये, पम्पसेट सामान्य वर्ग के कृषकों हेतु 22,500 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला, लघु एवं सीमांत कृषकों हेतु 27,000 रुपये, ड्रिप संयंत्र स्थापना लघु एवं सीमांत कृषकों हेतु 17,269 रुपये प्रति हेक्टेयर, अन्य कृषकों हेतु 14,130 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापना हेतु 15,000 रुपये का प्रावधान है। उद्यानिकी विभाग के अधिकारी कमल गावड़े ने बताया कि किसानों को विपणन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा सुकमा जिले के लिए शिवसांई ऑयल पाम प्राइवेट लिमिटेड, ऐलूरू (आंध्र प्रदेश) के साथ कृषक–कंपनी अनुबंध किया गया है। इससे किसानों को फसल बिक्री के लिए स्थायी बाजार सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि प्रति हेक्टेयर ढाई से तीन लाख रुपये की संभावित वार्षिक आय के मद्देनजऱ जिले में ऑयल पाम खेती किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो रही है।
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