अंबिकापुर 27 नवंबर 2025(आरएनएस) मैनपाट के कांडराजा तथा बतौली तहसील में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान और वनीकरण परियोजनाओं के नाम पर सरकारी व ग्रामीण भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जे की साजिश को लेकर स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक संगठन गहराई से चिंतित और आक्रोशित हैं।कांडराजा गाँव में लगभग 137 हेक्टेयर भूमि पर तीस नवंबर 2025 को होने वाली जनसुनवाई को लेकर व्यापक विरोध है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उद्योगपतियों के दबाव में भूमि को “बंजर” घोषित कर खदान के लिए अनुमति दे रहा है, जबकि वहाँ दशकों से खेती हो रही है और जमीन वैध पट्टों से सुरक्षित है। किसानों ने साफ कहा है कि वे किसी भी हालत में खदान खोलने नहीं देंगे क्योंकि इससे पर्यावरण, जलस्रोत, हाथियों के आवागमन और स्थानीय जीविका पर गहरा संकट आएगा।वहीं बतौली क्षेत्र के ग्राम बांसाझाल में वनीकरण के नाम पर सरकारी भूमि पर उद्योगपतियों द्वारा कब्जा करने की कुप्रथा भी सामने आई है। माँ कुदरगढ़ी स्टील्स प्रा. लि. ने 90.086 हेक्टेयर सरकारी जमीन का “प्रतिस्थापन वनीकरण” हेतु एनओसी मांगी है, जो ग्रामीणों की साझा उपयोग की भूमि है। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी और भूमि संबंधी निर्णय कई सवाल खड़े करते हैं।स्थानीय सामाजिक संगठन एवं जनप्रतिनिधि स्पष्ट करते हैं कि—पर्यावरण बेचा नहीं जाएगा।सरकारी भूमि की हड़प ऊपर से नीचे तक व्यापक जनप्रतिरोध को जन्म देगा।प्रशासन और वन विभाग की मौन सहमति को उद्योगपतियों का संरक्षण मानेंगे।ग्रामीणों की मांग है कि प्रस्तावित बॉक्साइट खदान को तत्काल निरस्त किया जाए और वनीकरण के नाम पर कब्जे की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच हो। पर्यावरणीय संतुलन, वन्यजीव संरक्षण व ग्रामीण आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।ग्रामीणों का सवाल है कि —”क्या शासन-प्रशासन जनमानस की आवाज़ सुनेगा, या सत्ता-धनबल के दबाव में क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहरों को स्थायी रूप से खो देगा?”यह समय है जब प्रशासन को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए सजग कदम उठाने होंगे।
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