००महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, सखी सेंटर, पालना केंद्र और मिशन शक्ति योजनाओं पर हुई व्यापक चर्चा
०अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे ने दिया स्पष्ट संदेश – हिंसा मुक्त समाज के लिए सबकी सहभागिता जरूरी
सुरेश मिनोचा
एमसीबी, 28 नवम्बर (आरएनएस)। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लिंग आधारित हिंसा उन्मूलन हेतु आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट के मार्गदर्शन में तथा अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे की अध्यक्षता में किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते हिंसा के मामलों की रोकथाम, कानूनों की जानकारी, शिकायत तंत्र को मजबूत बनाना और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुँचाना था। कार्यशाला की शुरुआत लिंग आधारित हिंसा के विभिन्न स्वरूपों जैसे घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीडऩ, मानसिक प्रताडऩा, साइबर हैरेसमेंट, दहेज प्रताडऩा और लैंगिक भेदभाव की पहचान से हुई। जिला मिशन समन्वयक तारा कुशवाहा ने बताया कि कई महिलाएँ सामाजिक दबाव या डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कर पातीं, जबकि कानून प्रत्येक महिला को सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने एक वास्तविक घटना का विवरण भी साझा किया जिसमें एक किशोरी की शिकायत पर तत्काल पुलिस हस्तक्षेप से उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया।बाल संरक्षण, ‘बाल विवाह मुक्त भारतÓ अभियान और सुरक्षित बचपन की दिशा में प्रयासजिला बाल संरक्षण इकाई ने बताया कि संकटग्रस्त बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय, बाल श्रम से मुक्ति, स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों को पुन: नामांकन, परामर्श सेवा और परिवार पुनर्वास जैसे कार्य निरंतर जारी हैं। हाल ही में होटल में काम कर रहे एक नाबालिग बच्चे को छुड़ाकर उसे शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया। ‘बाल विवाह मुक्त भारतÓ 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर पर सतर्कता दल सक्रिय हैं और विवाह आयु सत्यापन की प्रक्रिया तेज की गई है। एक गाँव में नाबालिग बालिका का विवाह रुकवा कर उसे सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर करना अभियान की प्रभावशीलता को साबित करता है। बच्चों के संरक्षण के तहत ‘गुड टच-बैड टचÓ जैसी महत्वपूर्ण जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की जानकारी दी गई, जिसके बाद कई बच्चों ने पहली बार अपने अनुभव साझा किए और आवश्यक हस्तक्षेप समय रहते संभव हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी बताया कि घरेलू हिंसा, दहेज, बाल विवाह, भरण-पोषण और अन्य मामलों में महिलाओं को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। एक घरेलू हिंसा पीडि़ता को मुफ्त वकील प्रदान कर उसे न्याय दिलाने का अनुभव भी साझा किया गया, जिससे वह आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रही है।मिशन शक्ति, सखी सेंटर, शक्ति सदन और महिलाओं की सुरक्षा-सशक्तिकरण की एकीकृत व्यवस्थामिशन शक्ति हब की विस्तृत जानकारी दी गई कि यह महिलाओं के लिए सुरक्षा, पुनर्वास और कौशल विकास की एकीकृत व्यवस्था है जहां मेडिकल सहायता, कानूनी सलाह, काउंसलिंग, आश्रय, पुलिस समन्वय और प्रशिक्षण जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। एक महिला को यहाँ सुरक्षित आश्रय और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया, जो मिशन शक्ति हब की सफलता का सशक्त उदाहरण है। नारी अदालत द्वारा स्थानीय स्तर पर महिलाओं के छोटे-मोटे विवादों को समझाइश से सुलझाकर लंबी कोर्ट प्रक्रिया से बचाने का कार्य भी बताया गया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण सुधार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे जिले की अनेक महिलाओं को लाभ मिला है। शक्ति सदन में मानव तस्करी, यौन उत्पीडऩ और बेघर महिलाओं को सुरक्षित आवास, चिकित्सीय उपचार, काउंसलिंग और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षित महिलाओं को आगे रोजगार से जोड़ा जाता है ताकि उनका पुनर्वास सुनिश्चित हो सके। सखी सेंटर, वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटर है जहां हिंसा पीडि़त महिलाओं को मेडिकल जांच, मानसिक परामर्श, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग, अस्थायी आवास और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में बयान देने जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं, जिससे पीडि़ताओं को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।पालना केंद्र, सखी निवास, सक्षम योजना, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित समाज का संदेशजिले में मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी में दो पालना केंद्र संचालित हैं जिनका उद्देश्य परित्यक्त या अनचाहे शिशुओं को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करना है। इन केंद्रों में शिशुओं को तुरंत मेडिकल जांच, पोषण और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाता है तथा बाद में कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उन्हें दत्तक ग्रहण हेतु योग्य दंपत्तियों को सौंपा जाता है। चिरमिरी पालना केंद्र में मिली एक बच्ची को सुरक्षित रखकर बाद में एक अच्छे परिवार को गोद दिया गया, जो पालना केंद्र की उत्कृष्ट सेवा का उदाहरण है। सखी निवास में हिंसा पीडि़त महिलाओं को सुरक्षित आवास, भोजन, चिकित्सा, परामर्श और प्रशिक्षण की सुविधा दी जाती है, जिससे कई महिलाएँ पुन: आत्मनिर्भर बन रही हैं। मनेंद्रगढ़ की एक पीडि़ता सखी निवास में रहते हुए प्रशिक्षित हुई और आज वह आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। सक्षम योजना के तहत अविवाहित, विधवा और परित्यक्त महिलाओं को मात्र तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है जिससे वे स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं। जिले की अनेक महिलाएं इस योजना से सशक्त हुई हैं। नोनी सुरक्षा योजना से बेटियों के भविष्य के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। बाल गृह में परिवार विहीन बच्चों को आवास, भोजन, शिक्षा और परामर्श प्रदान किया जाता है, जहाँ कई बच्चों ने शिक्षा और खेल में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। जिला पुलिस का साइबर सेल 24 घंटे सक्रिय रहकर ऑनलाइन ठगी, साइबर हैरेसमेंट, फर्जी अकाउंट और स्टॉकिंग जैसी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करता है तथा महिलाओं और छात्रों को साइबर सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक कर रहा है। कार्यशाला के समापन में अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे ने कहा कि हिंसा मुक्त समाज के निर्माण में प्रशासन के साथ समाज का सहयोग आवश्यक है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार खाती ने निर्देश दिया कि प्रत्येक अधिकारी और कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में लगातार जागरूकता अभियान चलाएँ और लोगों को योजनाओं से जोड़ें। संदेश दिया गया कि हिंसा न सहें, कानून पर भरोसा रखें और समाधान के लिए आगे आएँ, क्योंकि जागरूकता और संवेदनशीलता से ही सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। इस कार्यशाला में महिला
बाल विकास विभाग के सभी अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।
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