अजय दीक्षित
असम और पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने हैं। 14 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के बिहार विधानसभा चुनावों में जीत के बाद दिल्ली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि गंगा मैया बिहार से ही पश्चिमी बंगाल जाती है। प्रधानमंत्री का इशारा असम और पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनावों की ओर था । अभी दोनों राज्यों में से असम में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी मुख्यमंत्री है ।
289 सदस्यीय पश्चिमी बंगाल विधानसभा में 289 सीट है। यहां पर 2021के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 77 सीट जीती थी। यहां पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच होगा ।जबकि असम में 117 सदस्यीय विधानसभा में चुनावों में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होगा।
2021 असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 61 सीट जीती थी। कांग्रेस के तरुण गोगई और उनके पुत्र गौरव गोगई मरो करो का प्रश्न है। क्योंकि 2016 से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और हेमंत विश्व शर्मा मुख्यमंत्री है। दूसरी ओर चुनाव आयोग दोनों राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों गहन परीक्षण एसआईआर करा रहा है जिसके लिए ममता बनर्जी ने आंदोलन चला रखा है। बताया जाता है कि पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनावों में अब एक करोड़ बोटर कम हो जाएगा अभी 7.5 करोड़ लोग मतदाता सूचियों में दर्ज है।असम में भी 50 लाख लोग मतदाता सूचियों में से हटाए जाने है। दोनों राज्यों में भारी संख्या में बंगला देश की घुसपैठी है। दरअसल बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और राजद की करारी हार से पूर्वोत्तर भारत असर हुआ है ।
भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में एक मोहाल बना है जिसका असर असम और पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा।2021 के पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को 39 फीसदी वोट मिला था और तृणमूल कांग्रेस से लगभग 61 लाख वोट कम मिला था जो लगभग 9 फीसदी अधिक था 289 सदस्यीय विधानसभा में
77 सीट मिली थी।जबकि तुड़मूल कांग्रेस को 212 सीट मिली। तत्कालीन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी को मुद्दा बनाया था।
इससे बंगाल अस्मिता का प्रश्न बनकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आपुला मानुष का मुद्दा उठाया। लोगों ने शायद इसी मुद्दे पर वोट डाले।
अबकी बार स्थिति भिन्न है परसों दुर्गापुर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल का औद्योकरण,विकास,सड़क,
और तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है।यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीत बदलते हुए बांग्लादेश का मुद्दा उठाया है।
कहते हैं कि बंगाल में युवाओं का पलायन भी बड़ी संख्या में दिल्ली की ओर हुआ है।यानी रोजगार भी मुद्दा बनाया जा सकता है। पश्चिमी बंगाल में अगर मछली उद्योग को छोड़ दें तो कोई बड़ा उद्योग नहीं है। कलकत्ता से कोलकाता बना शहर वस्त्र,पटसन, जुट, हैवी मास्नरी के जाना जाता था मगर अब मर गया है कोलकाता शहर ,शेष रह गई है तो बस यादें।
पश्चिमी बंगाल इन दिन महिलाओं, स्त्रियां के शोषण के कुख्यात है और यहां से महिलाओं, स्त्रियां, बच्चियों की पूरे भारत में तस्करी होती है। महिलाओं के सशक्तिकरण के कोई योजना नहीं है।दूसरी ओर पश्चिमी बंगाल का सामाजिक तनावना बिगड़ रहा है और मुस्लिम बाहुल्य जिलों में अन्य हिन्दू, धर्म,जैन,परेशान हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण करन को बढ़ावा दे रही है।
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