बिलासपुर 5 दिसंबर 2025(आरएनएस) शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कानफोड़ू डीजे की बढ़ती आवाज आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती जा रही है। विवाह, पार्टियों और राजनीतिक आयोजनों में देर रात तक बज रहे तेज साउंड सिस्टम से बुजुर्गों, विद्यार्थियों, बीमारों और बच्चों का जीना मुश्किल हो गया है।
इसी समस्या के समाधान के लिए ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट सुरेश सिंह बैस ने 04 दिसंबर 2025 को शाम 6:24 बजे जिला प्रशासन को ईमेल के माध्यम से एक विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजा है। यह पत्र कलेक्टर बिलासपुर को collector-bsp.cg@gov.in, bilaspur.cg@gov.in पर आधिकारिक रूप से मेल किया गया।
समस्या की जड़ – कानफोड़ू डीजे और टूटते नियम

शहर के जूना बिलासपुर, गोल बाजार, सदर बाजार, गांधी चौक, शिव टॉकीज चौक, गोडपारा, तेलीपारा जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह समस्या चरम पर पहुंच चुकी है। संकरी सड़कों पर तेज आवाज और भीड़ की वजह से राहगीरों को जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषकर परीक्षा काल में विद्यार्थी परेशान हैं। कई छात्र देर रात तक डीजे बंद होने का इंतजार करते रहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह शोर तनाव, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर बढ़ने और नींद न आने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ऊँची आवाज के संपर्क में रहना सुनने की क्षमता पर स्थायी प्रभाव डाल सकता है।
कानून और मानकों की खुली अवहेलना
एक्टिविस्ट ने पत्र में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय मानकों का हवाला देते हुए कहा कि इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
नियमों के अनुसार रात 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार के तेज ध्वनि वाले उपकरण पूर्णतः प्रतिबंधित हैं, लेकिन शहर में इनका खुलेआम उपयोग किया जा रहा है।
प्रशासन से प्रमुख मांगें पत्र में कलेक्टर से निम्न प्रमुख कार्रवाई की मांग की गई है—
- शहर और गांवों में डीजे द्वारा हो रहे अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण की तत्काल जांच
- आयोजकों को ध्वनि स्तर मानकों और समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश
- रात 10 बजे के बाद डीजे/साउंड सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध
- नियम उल्लंघन करने वालों पर तुरंत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
- भविष्य के आयोजनों में अनुमति देते समय ध्वनि नियंत्रण नियमों को अनिवार्य किया जाए
नागरिकों में बढ़ती नाराज़गी
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीजे की तेज आवाजें अब महज़ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बन चुकी हैं।
ध्वनि प्रदूषण विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव बेहद हानिकारक होगा।

