भोपाल 5 दिसंबर (आरएनएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने इसे अवैध कटाई और अडाणी समूह को फायदा पहुंचाने की कार्रवाई बताया। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद उनके बचाव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सिंगरौली में आदिवासी कम हैं। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सिंगरौली में अवैध वन कटाई का मामला उठाया। जवाब में वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा, यह सही नहीं है कि वन क्षेत्र में अवैध कटाई हो रही है। खान और खनन मंत्रालय के निर्देश के आधार पर 2672 हेक्टेयर क्षेत्र में कटाई हुई है। जो भी पेड़ काटे गए हैं, वह नियम अनुसार कटे हैं।भारत सरकार की परमिशन के आधार पर कार्रवाई हो रही है।
पेड़ कटाई को लेकर विक्रांत भूरिया ने कहा, अगर सारी कटाई परमिशन के आधार पर हो रही है तो फिर विरोध की स्थिति क्यों बन रही है। 8 गांव अधिसूचित क्षेत्र से बाहर कैसे हो गए।
जवाब में मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा, जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उतने पेड़ लगाए भी जा रहे हैं। इसमें समस्या नहीं होना चाहिए और सारे काम केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति से हो रहे हैं। जितनी जमीन जा रही उतनी जमीन भी उपलब्ध कराई जा रही है।
कांग्रेस विधायक भूरिया ने कहा, सिंगरौली से पेड़ काटकर सागर और शिवपुरी में लगाए जा रहे हैं। ये कैसा न्याय है। आदिवासियों के साथ सदियों से ही अन्याय हुआ है। पहले अर्जुन को श्रेष्ठ बताने के लिए एकलव्य का अंगूठा काटा गया। अब अडाणी को श्रेष्ठ बताने के लिए सिंगरौली के आदिवासियों के जमीन से पेड़ काटे जा रहे हैं।
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, अडाणी समूह को खदानें दी गई हैं, जिसके लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। इसे पेसा एक्ट से बाहर बताया गया है। यहां पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन हुआ है। संपूर्ण सिंगरौली के संचय प्रभाव का आकलन हुआ है या नहीं हुआ है यह भी बताया जाए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, सिंगरौली वन कटाई के सवाल का जवाब वह सदन में चाहते हैं। इसे देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य वन मंत्री अहिरवार पहली बार के विधायक हैं, लेकिन उन्होंने काफी सही जवाब दिया है। सिंगरौली में कभी भी पेसा एक्ट नहीं रहा है। क्योंकि यहां आदिवासियों की संख्या कम रही है। यह बात अधिकारियों से चर्चा की बाद कह रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, जब पहले सिंगरौली ब्लॉक पेसा एक्ट के दायरे में आ रहा था, तो संसदीय कार्य मंत्री ने यह गलत जानकारी क्यों दी कि वह एरिया पेसा के दायरे में नहीं आता था। जबकि अगस्त 2023 में इसको लेकर साफ कहा गया है कि वह इलाका पेसा एक्ट के दायरे में आता है। सरकार इस बारे में जवाब दे।
इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा में बहस की स्थिति शुरू हो गई। इसके बाद कांग्रेस के विधायक नारेबाजी करते हुए बाहर निकल गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सदन में यह साफ हुआ कि कौन सदस्य जनता की समस्याओं के प्रति कितने जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भी इस सत्र में कई बार सकारात्मक भूमिका निभाई। सत्र के दौरान सरकार ने कई विधेयक और अनुपूरक बजट पारित किए, जो राज्य के विकास के लिए जरूरी हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कहा कि सदन में उठाए गए सवाल जनता से जुड़े थे और भविष्य में विधानसभा सत्र की अवधि और बढ़ाई जानी चाहिए। इसके बाद हंगामे और वॉकआउट के चलते विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

