अजय दीक्षित
देश के उत्तर भारत के सभी राज्यों की राजधानियों का अगर अध्ययन किया जाए तो सबसे शांत मप्र की राजधानी भोपाल ही एक ऐसा शहर है जो प्राकृतिक रूप से काफी सम्पन्न है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ,देश की राजधानी दिल्ली, बिहार की राजधानी पटना , राजस्थान की राजधानी जयपुर, गुजरात की राजधानी गांधीनगर, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई यहां तक कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से भी अधिक प्राकृतिक सौन्दर्य बिखरा हुआ है भोपाल में। भोपाल आजादी से पहले एक मुस्लिम प्रिंसली स्टेट थी और नबाब शासक हुआ करता था जिसमें अब के रायसेन, होशंगाबाद,आदि जिले भी थे । कहने को तो रियासत थी भोपाल मगर बहुत छोटी थी । आजादी के बाद बेगम सुल्तान अब जहांनुमा पैलेस से हुक्म चलाती थीं।भोपाल बड़े और छोटे तलाव के साथ 100 किलोमीटर रेडियस में जंगलों से घिरा था । इतिहास कार और मप्र के मुख्य सचिव रहे एम एन बुच ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी भोपाल में लिखा है कि भोपाल सतपुड़ा की पहाडिय़ों से घिरा एक जंगल ही था जहां बहुत ज्यादा मात्रा में जंगली जानवर थे ।बांस, पाखर, बट,पीपल,का घना जंगल था ।
जब प्रथम प्रधानमंत्री स्व जवाहर लाल नेहरू ने 1956 में मध्य प्रदेश राज्य बनाया तब राजधानी बनाने का प्रश्न उत्पन्न हुआ। चूंकि मध्यप्रदेश में विदर्भ, छत्तीसगढ़ ,मध्यभारत,भोपाल, महाकौशल, विंध्य प्रदेश का विलय हुआ था तो ग्वालियर सबसे बड़ी प्रिंसली स्टेट थी।महाराजा जीवाजी राव चाहते थे कि ग्वालियर राजधानी बने उधर इंदौर भी बड़ा शहर था। लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने बात मानी पूर्व राष्ट्रपति और तत्कालीन मुख्यमंत्री भोपाल शंकर दयाल शर्मा की और भोपाल को राजधानी घोषित किया उसमें मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल की भी सहमति थी ।जब विधानसभा भवन की समस्या आयी तो मिंटो हॉल का चयन किया गया था।
तत्कालीन समय में भोपाल रोशनपुरा तक ही था जिसमें पुलिस हेडक्वार्टर, मिंटो हॉल,भोपाल स्टेशन, बस स्टैंड, और पुराने भोपाल की बस्ती शामिल थी । आजादी के बाद भोपाल में एम जी एम मेडिकल कॉलेज, मौलाना आजाद इंजीनियरिंग कॉलेज, हमीदिया होस्टिटल, न्यू मार्केट,बनी ,
1960 के दशक में भोपाल में राजधानी के हिसाब से बल्लभ भवन, मंत्रियों के आवास 74 बंगले,चार इमली में बंगले, माध्यमिक शिक्षा मंडल, और कई प्रतिष्ठानों का निर्माण कार्य किया गया।
अब भोपाल लगभग 20 किलो मीटर रेडियस में है। लेकिन अभी भी देश की पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को छोड़ दें तो भोपाल जैसा सकून, शांति, तापक्रम,बारिश,सफाई, पर्यावरण संरक्षण,कहीं नहीं है।अभी भी मात्र 18 लाख की जनसंख्या है। हालांकि भोपाल में भी बहुत निर्माण कार्य किया गया है। राजधानी क्षेत्र के चलते प्रत्येक विभाग के मुख्यालय, प्रशासनिक अकादमी,ट्रेनिंग सेंटर,नई विधानसभा, नया मंत्रालय, बनाए गए है लेकिन निर्माण कार्य की इजाजत देने वाली संस्थाओं ने पर्यावरण से समझौता नहीं किया है ।नए भोपाल में सिविल सोसाइटी बनी है ।
भोपाल की खास बात यह भी है कि वहां कोई बहुत बड़ा बाजार नहीं है सभी कुछ बिखरा हुआ है।
भोपाल ही एक ऐसा राजधानी क्षेत्र जहां राष्ट्रीय बन अभ्यारण्य भी है।भोपाल की सबसे बड़ी खूब सुरती बड़ा तलाव है जो शायद भारत वर्ष सबसे बड़ा है। केरवा बांध, भदभदा ,कलिया सोत बांध भी जल संरक्षण के है । पूरे भारत में राज्यों की राजधानियों में अगर श्री नगर, देहरादून,गांधीनगर ही महानगरों के माप दंडों में भोपाल जैसे है जिनमें देहरादून तो हिमालय की गोद में बसा है जबकि गांधीनगर गुजरात की राजधानी के रूप में 1966 में अस्तित्व में आया है। श्रीनगर तो बताते हैं कि भारत का स्विट्जरलैंड है होकर हिमालय की में ही बसा है और वहां पर पर्यटन ही है एक भी औद्योगिक इकाई नहीं है।बस हिमालय में चीड़ और देवदार के वृक्ष ही है और घास के मैदान झेलम, चिनाव,जैसी नदियां है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो इस युग में भोपाल उत्तम राजधानी है। राजनीतिक दलों के छोटे बड़े कार्यालय है । लेकिन भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था है।अब तो मेट्रो भी निर्माणाधीन है और इस वर्ष के अंत में तो 2026 में आरंभ होगी ।
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