लखनऊ 08 Dec, (आरएनएस )। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद अखिलेश यादव ने संसद में ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई विशेष चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा पर ज़ोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रवादी नहीं, बल्कि राष्ट्र विवादी पार्टी है, जो हर मुद्दे में फूट डालकर राजनीति करती है। उनका कहना था कि “वंदे मातरम गाना जितना जरूरी है, उससे अधिक जरूरी है उसे निभाना।”अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि आजादी के आंदोलन की भावना, एकता और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने याद दिलाया कि जब कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार वंदे मातरम गाया, तभी से यह गीत जन-जन की आवाज़ बन गया। क्रांतिकारी अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए वंदे मातरम के नारे से जनता को जोड़ते थे। यह गीत आजादी की लड़ाई की धड़कन था।उन्होंने कहा कि अंग्रेज जहां भी वंदे मातरम का नारा सुन लेते थे, वहां देशद्रोह के मुकदमे लगा देते थे। बंगाल में बच्चों तक को गिरफ्तारी झेलनी पड़ी। अंग्रेजों ने 1905 से 1908 तक इस गीत पर प्रतिबंध भी लगाया, लेकिन क्रांतिकारी नहीं झुके और वंदे मातरम को अपने दिल में बसाए रहे।अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आज सत्ता पक्ष हर चीज को अपना बताने की कोशिश करता है, जबकि यह महान रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की देन है। उन्होंने कहा कि भाजपा का इतिहास देख लिया जाए, तो पता चलता है कि आजादी के आंदोलन और वंदे मातरम दोनों से उसका कोई रिश्ता नहीं रहा। “जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा ही नहीं लिया, वे वंदे मातरम का अर्थ और महत्व क्या समझेंगे?”उन्होंने आगे कहा कि भाजपा आज भी अंग्रेजों की तरह विवाद और बंटवारे की राजनीति कर रही है। “तिरंगा तक न फहराने वालों ने आज राष्ट्रवाद पर ठेका ले लिया है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के बाद भी कुछ संगठनों ने वंदे मातरम को क्यों नहीं स्वीकारा?अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम किसी दिखावे या राजनीति का विषय नहीं है। यह गीत साम्प्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने 2024 के चुनाव में भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीति को खत्म कर दिया। लेकिन भाजपा सरकार ने 26 हजार से अधिक प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए, और जब पीडीए समाज ने बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली तो उन पर भी मुकदमे दर्ज कर दिए गए।उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का वास्तविक भाव देश को मजबूत करना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना है। यह गीत हर भारतीय के भीतर देशभक्ति की ज्वाला जगाता है। “लोगों को चाहे पूरा गीत याद न हो, अर्थ न जानते हों, लेकिन वंदे मातरम के दो शब्द ही देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए पर्याप्त हैं।”समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि आजादी का आंदोलन वंदे मातरम, जय हिन्द और इंकलाब जिंदाबाद के नारों से प्रेरित होकर लड़ा गया। सभी जाति-धर्म के लोगों ने मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और यही संदेश आज भी प्रासंगिक है—कि देश तभी मजबूत होगा जब लोग एकजुट रहेंगे, न कि बांटने वाली राजनीति से।
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अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला, कहा– ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रवाद नहीं निभाने का प्रतीक है, भाजपा राष्ट्रवादी नहीं राष्ट्र विवादी पार्टी
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