बिलासपुर 14 दिसंबर 2025 (आरएनएस) समर्थन कीमतों पर धान बिक्री के लिए जिले में इस साल 1 लाख 32 हजार 373 किसानों ने पंजीयन कराया है, लेकिन आज तक धान बेचने केवल 32 हजार 862 किसान ही उपार्जन केंद्रों तक पहुंच पाए हैं, जबकि धान खरीदी प्रारंभ हुए अब लगभग एक महीने हो चुके हैं। एक लाख किसानों के अब भी धान खरीदी से दूर रहने के पीछे लेट बेरायटी को मुख्य कारण माना जा रहा है।प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी पंद्रह नवंबर से प्रारंभ की गई है, जिसके अब लगभग एक महीने पूरे होने को हैं। इस साल एग्रीस्टेक पोर्टल में 1 लाख 32 हजार 373 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने हेतु पंजीयन करवाया है, लेकिन धान बेचने उपार्जन केंद्र तक पहुंचने वालों की संख्या फिलहाल के लिए 32 हजार 862 तक ही पहुंच सकी है। धान बेचने वाले इन किसानों को अब तक 34 करोड़ 92 लाख 14 हजार 600 रूपए का भुगतान किया गया है। शुरूआती दौर में तीन महीने में पक जाने वाली महामाया जैसी अली बेरायटी लेने वाले किसानों के ही धान बेचने केंद्रों तक पहुंचने की बात मानी जा रही थी। यही कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में पंजीकृत होने व एक महीने खरीदी प्रारंभ होने के बाद भी करीब एक लाख किसान अब भी धान बेचने से अभी पीछे हैं।
किसानों का टोकन का नहीं कटना बड़ी वजह
जिले में टोकन जारी करने का अनुपात सत्तर व तीस का है। इसके अनुसार उपार्जन केंद्रों को धान खरीदी के लिए दी गई प्रतिदिन की लिमिट के अनुसर 10 प्रतिशत टोकव मोबाईल एप के जरिए काटे जाते हैं। इसी तरह केवल 30 प्रतिशत टोकन सहकारी समिति से जारी होने हैं। अनुपात में बडा़ अंतर होने के कारण बड़ी संख्या में किसान टोकन प्राप्त करने से वंचित रह जा रहे हैं। यही कारण है कि एक लाख से भी ज्यादा किसान अब तक धान बेचने के लिए नहीं पहुंच सके है।
कटाई के दौरान बारिश बनी बाधा
किसानों का कहना है कि इस साल धान कटाई के दौरान ही लगातर कई दिनों तक बारिश हो गई। ऐसे में खेतों में पानी जमा हो गया, जिससे धान की कटाई लगभग पंद्रह दिनों तक के लिए आगे बढ़ानी पड़ी। इसके अलावा आमतौर पर हार्वेस्टर से धान की मिसाई करवाने वाले किसानों को इस साल खेत गीला होने के कारण हार्वेस्टर की सुविधा नहीं मिल सकी। हार्वेस्टर खेत में फंसने के डर से मालिकों ने मिसाई के लिए किसानों को मना कर दिया, जिससे कटाई का काम हाथ से और मिसाई का काम येलर से करवाना पड़ा। लिहाजा खरीदी केंद्रों तक धान पहुंचने में विलंब हो गया है।

